पूर्णिमा की शांत रात में भारतीय शहर की एक संकरी गली, सामने खेतों के ऊपर उगता सुनहरी रोशनी से दमकता चाँद, धुंध में नहाया स्ट्रीट लाइट और हल्की एम्बर रोशनी में चमकते घर; माहौल में सादगी, स्मृति और अपनापन झलकता है।

पून्नो का चाँद

यह रचना पूर्णिमा की रात के एक दुर्लभ दृश्य को माँ की लोकबोली से जोड़ती है। चाँद सिर्फ आकाशीय पिंड नहीं रह जाता, बल्कि स्मृतियों, रिश्तों और भाषा के स्नेहिल स्पर्श में बदल जाता है—जहाँ “पूर्णिमा” माँ के लिए “पुन्नो” बन जाती है।

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देवरी स्थित धुकेश्वरी मंदिर सभागृह में आयोजित राज्यस्तरीय सम्मान समारोह में कवयित्री मेघा मनोज अग्रवाल को नारी रत्न सम्मान प्रदान करते संस्था के संस्थापक डॉ. घनश्याम निखाड़े, साथ में मंचासीन अतिथि और उपस्थित गणमान्यजन।

मेघा अग्रवाल का नाम राज्य में रोशन

नागपुर की प्रतिष्ठित कवयित्री मेघा मनोज अग्रवाल को समाजसेवा, हिंदी लेखन और उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए राज्यस्तरीय नारी रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान श्याम बहुउद्देशीय विकास संस्था की ओर से देवरी में आयोजित भव्य समारोह में संस्था के संस्थापक डॉ. घनश्याम निखाड़े द्वारा प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से नागपुर का नाम गौरवान्वित हुआ है।

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माया का जाल और आत्मा की उड़ान

जैसा कि वेद-पुराणों में वर्णित है कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् मनुष्य जीवन की प्राप्ति होती है। कहा गया है “जनमत मरत दुःसह दुख होई।”
प्राणी जब एक बार जन्म लेता है और मरता है, तब लाखों बिच्छुओं के डसने जैसी पीड़ा सहनी पड़ती है। बड़े सत्कर्मों के फलस्वरूप विवेकशील प्राणी मानव रूप में इस नश्वर जगत में जन्म लेता है।

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‘उरी’ से घर तक आया ‘विहान’

बॉलीवुड अभिनेता विक्की कौशल और कैटरीना कैफ ने बेटे के जन्म के दो महीने पूरे होने पर उसका नाम ‘विहान कौशल’ सार्वजनिक किया. दिलचस्प बात यह है कि इस नाम का जुड़ाव विक्की की सुपरहिट फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ से भी है. बेटे की पहली झलक साझा करते हुए कपल ने अपनी खुशियों और भावनाओं को फैंस के साथ बांटा.

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सर्दियों की ठंडी सुबह का यथार्थ दृश्य, हल्की धुंध से ढकी भारतीय गली, शॉल और ऊनी कपड़ों में लिपटे लोग, आग के पास हाथ सेंकते बुजुर्ग, चाय के कप लिए महिलाएं और जैकेट पहने बच्चे.

सर्दी का मौसम

ठंडी हवा ने जैसे पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया था. सुबह की धुंध गलियों में चुपचाप उतर आई थी और सूरज की किरणें मानो रास्ता तलाश रही थीं. लोग शॉल और स्वेटर में सिमटे, कदम धीरे-धीरे बढ़ा रहे थे. हर मोड़ पर चाय की भाप उठती दिखती थी, जो ठिठुरते बदन को थोड़ी राहत देती थी. कहीं बुजुर्ग आग के पास हाथ सेंकते नजर आते, तो कहीं बच्चे ठंड से सिकुड़ते हुए भी स्कूल की राह पकड़ते थे. यह सर्दी केवल मौसम नहीं थी, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चाल को थाम लेने वाली एक खामोश ताकत बन चुकी थी.

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एस. एम. जोशी ऑडिटोरियम, पुणे में होने वाले सृजन महोत्सव के दौरान लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दृश्य।

कला, संस्कार और समाज का संगम

पुणे में आने वाले दिनों में कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकार का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सृजन फाउंडेशन की ओर से 13 से 15 जनवरी तक तीन दिवसीय ‘सृजन महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इस बार नवी पेठ स्थित एस. एम. जोशी ऑडिटोरियम में प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित होगा।

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जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

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Person sitting in a quiet, dimly lit study, surrounded by papers, charts, and an open diary, contemplating social issues like suicide prevention and mental health, with soft morning light coming through a window symbolizing hope and awareness.

विचार विमर्श

सामाजिक विमर्श की अहमियत और आत्महत्या रोकने के बहुआयामी प्रयासों की ज़रूरत पर प्रकाश डालता है। आंकड़े, मानसिक और आर्थिक कारण, और परिवार की भूमिका पर विचार करते हुए यह जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।

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सूरज देखे हैं

हर नए सूरज की किरणें उम्मीद और नई उमंगों का संदेश देती हैं। ओस की बूँदों, उड़ते पक्षियों और शांति भरे क्षितिज के बीच यह दृश्य जीवन के हर अंत में नए आरंभ की प्रेरणा देता है।

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