शब्दों में बंधा मेरा दिल

तुम्हारी लिखी हर पंक्ति ने मुझे भीतर तक छू लिया। तुम्हारे शब्दों में गंभीरता और स्त्री‑सम्मान की झलक थी। धीरे‑धीरे तुम्हारा व्यक्तित्व मेरे मन में उतर गया, और अब मुझे लगता है कि मैं तुम्हारी लेखनी की प्रेयसी बन चुकी हूँ। हर रोज़ तुम्हारा लिखा पढ़ना, मेरे लिए एक नयी दुनिया की खोज और प्रेम का अनुभव है।

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ख्यालों में आता रहा…

वह ख्यालों में बार-बार आता रहा कभी याद बनकर सुलाता, कभी कसक बनकर रुलाता। कभी ज़ख़्मों पर मरहम था, तो कभी दिल की आग। साँसों में उसकी महक थी, बारिश की तरह वह बरसता रहा। जब दिल के दरवाज़े खुले, तो वही धड़कन बनकर बस गया। समय बेरहम था, इश्क़ पर परदा रहा और मैं, हर टूटन के बाद भी उसी को महसूस करती रही।

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कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है… ये कश्मीर है

म बचपन से पढ़ते आए हैं …धरती पर अगर स्वर्ग कहीं है तो यहीं है… यहीं है… यहीं है…. अमीर खुसरो ने कश्मीर को बहुत सुंदर तरीके से व्यक्त किया है. थोड़े बड़े हुए तो और एक गीत सुना… कितनी खूबसूरत यह तस्वीर है… हां यह कश्मीर है. कश्मीर का नाम सुनते ही एक खूबसूरत तस्वीर नजरों के सामने आ जाती है जो हमने अक्सर फोटोस या फिल्मों में देखी है. बर्फ से ढकी चोटियां, खूबसूरत कॉटेज और पानी पर बहते हुए शिकारे यह तमाम खासियत कश्मीर को धरती का स्वर्ग बनाती है.

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मध्यप्रदेश टूरिज्म पीएमश्री वायु व हेली सेवा से रिकॉर्ड निवेश

2025 में मध्यप्रदेश टूरिज्म ने पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा, हेली सेवा और रिकॉर्ड निवेश के साथ नई ऊंचाइयां हासिल कीं. 14 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे और पर्यटन विकास को नई गति मिली.

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अंतर्राष्ट्रीय पेन फेस्टिवल पुणे उद्घाटन समारोह"

पेन, स्याही और शब्दों का महाकुंभ

बचपन से ही पेन और स्याही हर इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा रहे हैं। भावनाएं हों या विचार, जानकारी हो या कल्पना शब्दों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करने का माध्यम यही लेखन उपकरण रहे हैं। इसी लेखन संस्कृति का उत्सव मनाने जा रहा है पुणे, जहां 10 और 11 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय पेन फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है।

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चुप्पी में दर्ज एक स्त्री

स्त्री के उस अनकहे इतिहास की साक्षी है, जिसे वह नीले निशानों, झुकी आँखों और मौन सहमति के बीच ढोती रहती है। पिता से पति तक, देह से धर्म तक, वह हर भूमिका निभाती हुई अपनी इच्छाओं को अवर्जित कर देती है। अहिल्या, द्रौपदी, उर्मिला और सीता की तरह वह सदियों से अग्नि-परीक्षाओं में झोंकी जाती है फिर भी सृजन करती है, सहती है और अंत तक एक अभेद रहस्य बनी रहती है

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क्रान्ति

ह कविता तात्कालिक सुख और अधैर्य से भरी दुनिया के बीच धैर्य, साधना और विचार की क्रान्ति का घोष है। रिश्तों को मौसमी फल-फूल नहीं, बल्कि चिनार और आम जैसे दीर्घजीवी वृक्ष मानते हुए यह रचना बताती है कि सच्चा परिवर्तन समय, सतत प्रयास और विश्वास से जन्म लेता है और वही विचारों की वास्तविक क्रान्ति है।

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मैं तुम्हें सोचता रहता हूँ…

यह कहानी प्रतीक्षा के उस नाज़ुक क्षण की दास्तान है, जहाँ प्रेम शब्दों से पहले मौन में पलता है। किताबों, कॉफी-हाउस और बारिश में भीगे स्वीकार के बीच, एक स्त्री वर्षों तक एक वाक्य के सहारे जीती रहती है—“I am well thinking of you always.” यह केवल स्वीकार नहीं, बल्कि संकोच, भय और आत्म-संयम को पार कर प्रेम को आवाज़ देने की कथा है।

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डॉ.अमरेंद्र की काव्य पुस्तक विशाखा विमोचित

स्नेह, सम्मान और साहित्य के त्रिवेणी संगम में सम्पन्न हुआ ‘विशाखा’ का विमोचन केवल एक पुस्तक-प्रस्तुति नहीं, बल्कि संवेदनाओं का उत्सव था। बिना किसी भव्य मंच के, आत्मीय वातावरण में शब्दों ने आत्मा से संवाद किया और बिहार की दो बेटियों के संकल्प ने ‘मिलकर प्रेरित करें बिहार’ को जीवंत अर्थ दे दिया।

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हर जन्म की प्यास

मीठी नदी के आत्मस्वर में कही गई एक भावपूर्ण यात्रा है. जहाँ स्वप्नों की मिठास लेकर वह उदधि से मिलन को निकल पड़ती है। खारापन स्वीकार्य है, क्योंकि हर जन्म की प्यास वहीं शान्त होती है। वर्षों की भटकन, नयनों में भरा जल, और नमन से भरा समर्पण सब मिलकर प्रेम, प्रतीक्षा और स्वीकार की एक शान्त, उजली कथा रचते हैं।

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