संवाद और ख़्याल

आज मन संवाद के लिए तरसता है।
मौन और डिजिटल दुनिया के बीच,
वह तेज़ और धीमी रफ्तार वाला संवाद सिर्फ़ मेरी यादों में बचे हैं। आज मैं अपने पायल की छम-छम और शॉवर की बूंदों में उस मौन जुगलबंदी का अनुभव कर रही हूँ।

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एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

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मोबाइल की लत में डूबा समाज दर्शाती हिंदी कविता “मोबाइल की दुनिया”

मोबाइल की दुनिया

मोबाइल आज ज्ञान, संचार और सुविधा का माध्यम है, लेकिन अंधाधुंध उपयोग ने रिश्तों, बचपन और मूल्यों को संकट में डाल दिया है। चन्द्रवती दीक्षित की यह कविता तकनीक और विवेक के बीच
संतुलन की ज़रूरत को गहराई से उजागर करती है।

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रात के शांत माहौल में खिड़की के पास बैठी लड़की, खामोश मोहब्बत और अनकहे प्यार के भावों में डूबी हुई

खामोश मोहब्बत

कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो कभी शब्दों में नहीं ढलते, फिर भी सबसे सच्चे होते हैं। “खामोश मोहब्बत” एक ऐसी ही अनकही भावनाओं की कविता है, जो दिल को छू जाती है।

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कुछ नजारे ऐसे…

कुछ नज़ारे ऐसे होते हैं जो पूरी ज़िंदगी को समेटे रहते हैं। वे लौटकर फिर कभी नहीं आते, लेकिन जाते हुए भी दिखाई नहीं देते। कभी वे प्रेम-रस से भरे बादलों की तरह मन के भँवर को पागल बना देते हैं, तो कभी यादों के आकाश में उड़ते पंछियों की तरह हमें बीते दिन और रातें लौटा लाने को मजबूर करते हैं।

कुछ नज़ारे आँखों के काजल जैसे होते हैं, जो मन में फूलों की डोली सजा देते हैं और अपनी रंग-बिरंगी खुशबू से जीवन भर को महका जाते हैं। जब वे याद आते हैं, तो चेहरे पर एक मुस्कान ले आते हैं और यह अहसास कराते हैं कि जीवन में कोई प्यारा साथ है, जिसके साथ ज़िंदगी जीने लायक बनती है।

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म्मा: दादी की यादों, संस्कारों और ममता पर भावुक कविता

अम्मा

अम्मा” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो दादी की ममता, संस्कार और बचपन की यादों को सहेजती है. 2010 के बाद के अकेलेपन और भावनात्मक रिक्तता को यह रचना बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है.

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चाँदनी रात में हवा में लहराते लंबे बालों वाली महिला, जिसके आसपास भावनात्मक और रहस्यमयी माहौल है

जुल्फ़ तेरी

तेरी जुल्फ़ों की खुशबू और उनकी नरम छाँव में जैसे मैं खुद को भूलता चला गया। तेरी मौजूदगी में ऐसा सुकून मिला, मानो पूरी कायनात सिमटकर एक एहसास बन गई हो। लेकिन उसी चाँदनी रात में, जब भावनाएँ शब्दों में ढल रही थीं, कुछ ऐसा हुआ कि सारी इबारतें जलकर राख हो गईं। अब बस एक खामोशी, कुछ अधूरे जज़्बात और एक अनकहा सवाल रह गया है, जो आज भी दिल के किसी कोने से मुझे चुपचाप देखता है।

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प्रेम का संगम

यह कविता गहरे प्रेम और स्मृतियों की शक्ति को दर्शाती है। कवयित्री अपने प्रिय के अस्तित्व को अपनी स्मृतियों और प्रार्थनाओं में जीवित रखती है। उसका प्रेम इतना निष्ठावान है कि उसने किसी उद्देश्य या लक्ष्य की अपेक्षा नहीं की, केवल यह सुनिश्चित किया कि वह अपने प्रिय की खुशी और अस्तित्व का सम्मान करती रहे। कवयित्री अपने प्रेम को एक फल या कर्म के रूप में समर्पित करती है और इसे ईश्वर के माध्यम से पवित्र बनाती है।

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धारा और संकल्प

कंकड़ और पत्थरों ने मिलकर नदी की दिशा मोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने उसके प्रवाह को रोकने के लिए बाँध बनाए, टीले खड़े किए और पहाड़ बनने का सपना देखा। लेकिन नदी – जो स्वयं प्रवाह की देवी है – न रुकी, न झुकी। वह ठोकरें खाती रही, पर हर बाधा के पार एक नया मार्ग खोजती रही। अपनी गति को कभी न छोड़ते हुए, उसने प्यासों को जल, खेतों को हरियाली और जीवन को उम्मीद दी। अंततः, जब सारे पत्थर थक गए और टीले मिट्टी बन गए, नदी अपनी मंज़िल — समुद्र — तक पहुँच गई। उसने सिद्ध किया कि उसे रोका जा सकता है थोड़ी देर के लिए, पर हमेशा के लिए नहीं। क्योंकि उसका अस्तित्व ही बहते रहने में है।

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