गणित और जिंदगी
यह कविता गणित के प्रतीकों—जोड़, घटाव, शून्य और अनंत—के माध्यम से जीवन, रिश्तों और दृष्टिकोण की जटिलताओं को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

यह कविता गणित के प्रतीकों—जोड़, घटाव, शून्य और अनंत—के माध्यम से जीवन, रिश्तों और दृष्टिकोण की जटिलताओं को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।
यह खूबसूरत ग़ज़ल जीवन के गहरे सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है। इसमें प्रेम, धैर्य, हौसला और आत्मविश्वास का संदेश छिपा है। ज़िन्दगी कठिन हो सकती है, मगर उसे अपनाना ही जीत है। टूटे ख्वाबों के बाद भी हिम्मत बनाए रखना, दिल की हर बात हर किसी से न कहना और रोशनी को बांटते रहना ये ग़ज़ल इन्हीं जीवन मूल्यों को सलीके से सामने लाती है। हर शेर इंसान को भीतर से मजबूत बनने, खुद से जुड़ने और उम्मीद की लौ जलाए रखने की प्रेरणा देता है।
अर्चना ज्ञानी, उज्जैन कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास सेउच्च शिखर पर बढ़ती रहो। अपनी लक्ष्मण-रेखास्वयं खींचकर,मान-सम्मान की गरिमामयीघृत-दीपज्योति बनो। पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,सागर-सी गंभीरता,आकाश-सी विशालता लिए,नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो। मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सीसदा तुम दमकती रहो।मेरे पावन संस्कारों में पली,चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,सदा तुम चहकती रहो। माँ…
श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस का आयोजन आज अत्यंत भक्तिमय, उल्लासपूर्ण और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से गुंजायमान रहा। हर ओर “श्रीकृष्ण” नाम का संकीर्तन, भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि और श्रद्धा की तरंगें वातावरण को पावन बना रही थीं।
दैनिक भास्कर में बिताए वर्षों की कुछ यादें ऐसी हैं, जो एक संपादक के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को सामने लाती हैं। श्रवण गर्ग के साथ खबरों पर तीखी बहस, रिपोर्टर की बेबाकी, कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और नाग-कोबरा वाला वह मजेदार प्रसंग न्यूज़रूम की एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।
नौवीं कक्षा से शुरू हुई रीता दास राम की साहित्यिक यात्रा कविता, कहानी, उपन्यास और संपादन तक फैली है। इस साक्षात्कार में उन्होंने साहित्य की सामाजिक जिम्मेदारी, स्त्री-अनुभवों और बदलते समय की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए हैं।
पिता पूरी जिंदगी बच्चों की खुशियों और भविष्य के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन अपने प्रेम को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। यह भावुक लेख पिता और संतान के बीच अनकहे प्यार, अधूरी इच्छाओं और समय रहते भावनाएं जताने की अहमियत को समझाता है।