gulmohar
सोशल मीडिया पर नए रिश्ते की तस्वीर साझा करते युवा भारतीय जोड़े का दृश्य

प्यार छिपाना नहीं, धीरे-धीरे बताना

सोशल मीडिया के दौर में रिश्तों को जाहिर करने का अंदाज भी बदल गया है। कोई अपने साथी की मौजूदगी के छोटे-छोटे संकेत देता है तो कोई रिश्ते को खुलकर स्वीकार करता है। जानिए इस बदलते चलन के पीछे की वजह।

Read More

‘अर्घ्य’ मराठी काव्य संग्रह का विमोचन

मुंबई में संपन्न हुई काव्य गोष्ठी में युवा कवि उमेश चव्हाण के मराठी काव्य संग्रह ‘अर्घ्य’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख साहित्यकारों और कला-संस्कृति के गणमान्य व्यक्तियों ने पुस्तक की प्रशंसा की और कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।

Read More

लोभ जीवन में विनाश लाता है : डॉ. अमृतरसा श्रीजी

महिदपुर रोड के श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने धर्मसभा में लोभ को सबसे खतरनाक कषाय बताते हुए कहा कि लोभ व्यक्ति को दुर्गति, विनाश और पतन की ओर ले जाता है. इस अवसर पर 51 से अधिक सिद्धितप तपस्वियों की तपस्या जारी है और 20 अगस्त से नवकार महामंत्र आराधना का शुभारंभ होगा.

Read More
बाद तेरे कभी किसी को भी हिंदी ग़ज़ल

बाद तेरे कभी किसी को भी…

बाद तेरे कभी किसी को भी अहमियत दी न ज़िंदगी को भी… प्रेम, विरह और यादों के एहसास से बुनी यह ग़ज़ल रिश्तों की गहराई और मन की खामोशी को शब्द देती है।

Read More
स्टेशन पर वर्षों के इंतजार के बाद पहली बार मिले राघव और रिद्धिमा

प्यार का इंतज़ार

राघव और रिद्धिमा के बीच दूर रहकर शुरू हुआ रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में बदल गया. वर्षों के इंतजार के बाद जब दोनों पहली बार आमने-सामने आए, तो उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ था और शब्द बहुत कम.

Read More

नवदुर्गा के प्रेरक दोहे

नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री का सुंदर दरबार सजता है, जिनकी आराधना से जीवन में ममता और वात्सल्य का संचार होता है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का स्मरण किया जाता है, जो तप, साधना और भक्ति की प्रतीक हैं।

माँ चंद्रघंटा अपने अपार सौंदर्य और दिव्य छवि के साथ पीले वस्त्र धारण कर सिंह पर सवार होकर भक्तों को संकटों से मुक्त करती हैं। कूष्मांडा स्वरूप धारण करने वाली माँ के ध्यान से शोक, भय और अशुभता दूर होकर शुभ वरदान मिलता है। पंचम रूप में माँ स्कंदमाता के दर्शन से अद्भुत शांति और कृपा प्राप्त होती है।

Read More
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड़ लगाते लोग, हरित प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।

Read More

अस्तित्व…

अस्तित्व की खोज में वह खुद से बार-बार टकराती है। कभी सपनों में, कभी आकांक्षाओं में, तो कभी शब्दों की परछाइयों में अपने होने का अर्थ तलाशती है। वह अपने भीतर दबे सवालों को सुनती है—”कौन हूँ और क्या हूँ मैं?” और हर बार यह अहसास होता है कि उसका वजूद अभी अधूरा है। यही अधूरापन उसे फिर से जगाता है, नव-कोंपलों-सा उगाता है। अंततः वह अपने भीतर एक ऐसा वृक्ष देखती है, जो अपनी जड़ों से अनगिनत संभावनाएँ पोषित करता है। यही उसका नया अस्तित्व है—सशक्त, गहन और अडिग।

Read More

वह सुबहें, वह होटल, वह जूनून

महिदपुर रोड की शंकर सेठ की होटल, और वहाँ डम्प होने वाले अखबार। बचपन का वह लड़का, जो फिल्मों के पोस्टर और शो टाइम्स जानने के लिए हर दिन सुबह निकल पड़ता।
पहले डर और हिचकिचाहट के साथ, धीरे-धीरे वह परिचितों में ढल गया—रामनिवास मंडोवरा काकाजी, कालू दा, चंद्रकांत जोशी। अखबारों के पन्नों में डूबते हुए उसका जुनून बन गया आदत, और फिर लत।शंकर सेठ की होटल सिर्फ एक जगह नहीं थी. वह वह मंच थी जहाँ बचपन की जिज्ञासा और सपने पत्रकारिता की दुनिया में बदलने लगे

Read More