एक भारतीय दृष्टिदिव्यांग महिला रेडियो स्टूडियो में हेडफोन पहनकर माइक्रोफोन के सामने आत्मविश्वास के साथ बोलती हुई, प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

लक्ष्मी : एक आवाज़ जो बदल रही है सोच

देहरादून की शांत वादियों से उठी एक आवाज़ आज समाज की सोच को चुनौती दे रही है. यह कहानी है लक्ष्मी कीभारत की पहली सर्टिफाइड दृष्टि दिव्यांग (विजुअली इम्पेयर्ड) रेडियो जॉकी, जिन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज के स्थापित पूर्वाग्रहों को भी तोड़ने का साहस दिखाया.

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मैं कहीं भी नहीं थी: स्त्री अस्तित्व और पहचान पर मार्मिक कविता

मैं कहीं भी नहीं थी…

यह कविता एक ऐसी स्त्री की आवाज़ है जो हर जगह मौजूद होते हुए भी कहीं दर्ज नहीं थी। यह उसकी पहचान, उसकी अनसुनी चीख और उसके जीवित रहने के अधिकार की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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मुंबई में साहित्य की स्मृति का उत्सव

मुंबई की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘गुलदान’ द्वारा आयोजित हस्तीमल ‘हस्ती’ स्मृति सम्मान समारोह में हिंदी–उर्दू साहित्य, संगीत और नृत्य का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में देशभर के कवि–शायरों की उपस्थिति रही, वहीं वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। यह आयोजन साहित्यिक स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त प्रयास बना।

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असुंदर है

*“असुंदर है”* समाज के विकृत चेहरों को उजागर करने वाली रचना है। कवि ने इस कविता में बार-बार “असुंदर है” कहकर हमारे भीतर और हमारे समाज में फैली उन कुरूप सच्चाइयों की ओर ध्यान दिलाया है, जिन्हें हम सामान्य मानकर अनदेखा करते रहते हैं।
कवि कहता है कि असुंदर है जब मनुष्य, मनुष्य के साथ भेदभाव करता है — किसी को महान और किसी को तुच्छ समझता है। यह असुंदर है जब पुरुष को मोक्ष का अधिकारी माना जाता है और स्त्री को पैरों की जूती समझा जाता है। असुंदर है जब पत्थरों को ईश्वर कहा जाता है, लेकिन मनुष्यों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता है।
गाँव के बीच मंदिर बनाना और कुछ लोगों को गाँव के बाहर बसाना भी असुंदर है। पत्थरों की पूजा करते हुए उन्हीं पर पशुओं की बलि चढ़ाना और जाति-धर्म के नाम पर लोगों को बाँटकर आपस में लड़ाना भी असुंदर है।

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हिंदी लेखिका मौसमी चन्द्रा का चित्र, जिनकी रचनाएँ कविता, कहानी और साहित्य संपादन के क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं

मौसमी चंद्रा: एक उर्जावान और संवेदनशील रचनाकार

मौसमी चन्द्रा एक बहुमुखी हिंदी लेखिका और संपादिका हैं, जिनकी रचनाएँ भावनात्मक गहराई और सामाजिक सरोकारों से परिपूर्ण हैं।

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मंजू बृजनंदन शर्मा का सम्मान समारोह, योगी आदित्यनाथ के साथ

टूटा डॉक्टर बनने का सपना, बनीं कॉमेडी की स्टार

छोटे शहर से निकलकर अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली मंजू बृजनंदन शर्मा की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है। असफलताओं को ताकत बनाकर उन्होंने सफलता की नई मिसाल कायम की।

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कदंब तले: राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति रस से सजी भावपूर्ण कविता

कदंब तले

कदंब वृक्ष की छांव में खड़े श्याम, राधा का पिघलता मन, बांसुरी की मधुर तान और प्रेम रस की वर्षा—‘कदंब तले’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति की अनुपम अनुभूति कराती है।

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Street food vendor cooking on stove with limited gas cylinder amid LPG crisis in India

एलपीजी संकट : रेस्टोरेंट मेन्यू से गायब हो रहे व्यंजन

भारत में बढ़ती एलपीजी कमी का असर अब रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड व्यवसाय पर साफ दिखाई दे रहा है। गैस की कमी के कारण कई शहरों में रेस्टोरेंट अपने मेन्यू से डोसा, रोटी, भटूरा और धीमी आंच पर बनने वाले व्यंजन हटाने लगे हैं।

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सूरज रे तू बढ़ता चल

सूरज रे तू बढ़ता चल” एक प्रेरणादायक कविता है जो अंधकार, थकान और कठिन परिस्थितियों के बीच निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती है। सूरज यहाँ केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि साहस, उम्मीद और उजाले का प्रतीक बनकर उभरता है।

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