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मुंबई में साहित्य की स्मृति का उत्सव

गुलदान ने रचा हस्तीमल ‘हस्ती’ सम्मान का ऐतिहासिक मंच

गुलशन मदान, अध्यक्ष, गुलदान संस्था

मुंबई।
हिंदी–उर्दू साहित्य की साझा विरासत और रचनात्मक स्मृतियों को जीवित रखने की दिशा में मुंबई की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘गुलदान’ ने एक उल्लेखनीय पहल करते हुए हस्तीमल ‘हस्ती’ स्मृति सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया। यह साहित्यिक–सांस्कृतिक कार्यक्रम एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, कल्चर सेंटर ऑडिटोरियम, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई में संपन्न हुआ। समारोह में देशभर से आए शायरों, कवियों, लेखकों और कला-संस्कृति जगत की जानी-मानी हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे एक स्मरणीय साहित्यिक उत्सव में बदल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध वरिष्ठ संगीतकार कुलदीप सिंह ने की, जबकि उनके साथ मंच पर मशहूर ग़ज़ल गायक जसविंदर सिंह मौजूद रहे . कार्यक्रम की विशेष भावनात्मक उपस्थिति के रूप में हस्तीमल ‘हस्ती’ की पत्नी श्रीमती पारस देवी बंब, सुपुत्र प्रमोद बंब और पोते कुमार दक्ष बंब भी समारोह में शामिल हुए।

स्मृति, संवेदना और साहित्य का संगम

समारोह का शुभारंभ ‘गुलदान’ संस्था के अध्यक्ष गुलशन मदान के स्वागत वक्तव्य से हुआ। उन्होंने हस्तीमल ‘हस्ती’ के साहित्यिक अवदान, उनसे जुड़े व्यक्तिगत संस्मरणों और उनके साथ बिताए पलों को साझा करते हुए भावुक स्वर में कहा कि

“साथ कई अफ़साने थे जब साथ रहे,
बिछड़े तो बस एक कहानी साथ रही।”

इसके पश्चात हस्तीमल ‘हस्ती’ के जीवन और रचनात्मक यात्रा पर आधारित एक वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया, जिसने श्रोताओं को उनकी साहित्यिक ऊँचाइयों और मानवीय संवेदनाओं से रूबरू कराया।

सुर, नृत्य और शब्दों की त्रिवेणी

हस्तीमल ‘हस्ती’ की कालजयी ग़ज़ल “प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है” की विशेष प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर गायिका श्रद्धा जैन के सुमधुर गायन और कुमारी कशिश मेहरोत्रा के मनोहारी कत्थक नृत्य ने स्मृति को मंच पर सजीव कर दिया।साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार नंद लाल पाठक एवं प्रख्यात उर्दू शायर ओबैद आज़म आज़मी को हस्तीमल ‘हस्ती’ स्मृति सम्मान से नवाज़ा गया। उन्हें स्मृति चिन्ह, फूलमाला और शॉल भेंट किए गए।सम्मान समारोह के दौरान हास्यकवि सुभाष काबरा और आशीर्वाद संस्था की सुश्री नीता बाजपेई ने सम्मानित रचनाकारों पर सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किए।

दूसरे सत्र की शुरुआत में गुलशन मदान की एक ग़ज़ल जिसे पद्मश्री अनूप जलोटा ने स्वर दिया और विवेक प्रकाश ने संगीतबद्ध कियाका ऑडियो कार्यक्रम अध्यक्ष कुलदीप सिंह द्वारा विमोचित किया गया।इसके बाद आयोजित कवि-सम्मेलन में देशभर से आए लगभग 20 रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। प्रमुख कवियों में राजेंद्र गौतम (दिल्ली)अंकिता खत्री ‘नादान’ (वाराणसी)तथा स्थानीय और आमंत्रित रचनाकारों में अभिलाष अवस्थी, देवमणि पांडेय, अमर त्रिपाठी, अर्चना जौहरी, ज़ीनत एहसान कुरैशी, नवीन चतुर्वेदी, अश्विनी उम्मीद, डॉ. वागीश सारस्वत, अर्चना वर्मा सिंह, रीमा राय सिंह, डॉ. वासिफ यार, डॉ. प्रमोद कुमार ‘कुश तनहा’, हास्यकवि आशकरण अटल, मुकेश गौतम, मीनू मदान सहित अनेक कवि-शायर शामिल रहे।हस्तीमल ‘हस्ती’ स्मृति सम्मान समारोह न केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम रहा, बल्कि यह भी प्रमाणित हुआ कि साहित्यिक स्मृतियाँ मंच, संगीत और शब्दों के माध्यम से नई पीढ़ी तक जीवित रखी जा सकती हैं। ‘गुलदान’ की यह पहल मुंबई की साहित्यिक संस्कृति में एक सशक्त और संवेदनशील हस्तक्षेप के रूप में याद की जाएगी। दोनों सत्रों का मंच संचालन सुश्री मनीषा कंठालिया ने किया।

One thought on “मुंबई में साहित्य की स्मृति का उत्सव

  1. इस कार्यक्रम में दर्शक बनने का आनंद प्राप्त हुआ।

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