कहां बनते हैं पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
नई दिल्ली-हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित होने वाले पद्म पुरस्कार केवल नामों की सूची नहीं होते, बल्कि वे उस भारत की तस्वीर पेश करते हैं, जो सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता को महत्व देता है. Padma Awards 2026 की घोषणा के साथ ही एक सवाल फिर चर्चा में है. इतने प्रतिष्ठित पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे मेडल आखिर कहां बनाए जाते हैं और सरकार इन पर कितना खर्च करती है.कम लोग जानते हैं कि देश के सभी पद्म पुरस्कार पदक कोलकाता स्थित अलीपुर मिंट में तैयार किए जाते हैं. यह मिंट वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली सरकारी संस्था सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधीन है. यही टकसाल भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के पदक भी बनाती है.
इन पदकों की खास बात यह है कि भले ही इन्हें देश का बड़ा नागरिक सम्मान माना जाता है, लेकिन ये ठोस सोने या चांदी के नहीं होते. पद्म विभूषण कांस्य से बना होता है, जिस पर प्लेटिनम की सजावट की जाती है. पद्म भूषण भी कांस्य का होता है, लेकिन उस पर सोने की परत चढ़ाई जाती है, जबकि पद्मश्री में स्टेनलेस स्टील की सजावट होती है. हर पदक पर कमल का प्रतीक और देवनागरी व अंग्रेजी में शिलालेख अंकित किया जाता है.
सरकार पद्म पदकों पर होने वाले खर्च का अलग से खुलासा नहीं करती. चूंकि ये पदक सरकारी टकसाल में बनाए जाते हैं, इसलिए इनकी लागत को नियमित सरकारी निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है. अहम बात यह है कि पद्म पुरस्कार के साथ न तो कोई नकद इनाम, न पेंशन और न ही विशेष सरकारी सुविधा दी जाती है. यह सम्मान पूरी तरह सामाजिक प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा होता है.
Padma Awards 2026 में सरकार ने 5 लोगों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 114 हस्तियों को पद्मश्री देने का निर्णय लिया है. अभिनेता धर्मेंद्र और सामाजिक कार्यकर्ता वीएस अच्युतानंदन को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया गया है. झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरे शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिला है, जबकि महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी इस सूची में शामिल किया गया है.पद्म पुरस्कार यह संदेश देते हैं कि भारत में सम्मान का मूल्य धातु से नहीं, बल्कि योगदान और प्रभाव से तय होता है.
