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बर्फ में फेरे, अग्नि में संकल्प

Snowfall wedding at Triyuginarayan Temple Rudraprayag Uttarakhand

त्रियुगीनारायण में वसंत पंचमी पर सात शादियां

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

उत्तराखंड की केदारघाटी में वसंत पंचमी के दिन एक असामान्य लेकिन ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब त्रियुगीनारायण मंदिर परिसर में गिरती बर्फ के बीच एक साथ सात जोड़ों ने विवाह किया। शून्य से नीचे तापमान और लगातार बर्फबारी के बावजूद सभी विवाह पूरे वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुए।

त्रियुगीनारायण मंदिर, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में जाना जाता है, में देश के विभिन्न राज्यों से आए वर-वधुओं ने सदियों से जल रही अखंड धूनी के समक्ष सात फेरे लिए। मंदिर समिति के अनुसार, इस वर्ष यहां दो विवाह पश्चिम बंगाल, दो महाराष्ट्र और तीन उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए जोड़ों के संपन्न हुए।

विवाह के दौरान मंदिर परिसर में बर्फ लगातार गिरती रही, लेकिन अग्नि के चारों ओर खड़े वर-वधु और परिजन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रस्में निभाते नजर आए। कई नवविवाहितों ने कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद इस पवित्र स्थल पर विवाह करना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था।

मंदिर समिति ने बताया कि त्रियुगीनारायण में विवाह के लिए कम से कम छह माह पूर्व पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। बुकिंग मिलने के बाद ही अखंड धूनी के समक्ष विवाह की अनुमति दी जाती है। यह स्थान केदारनाथ धाम के निकट स्थित होने के कारण धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

त्रियुगीनारायण की अखंड धूनी को शिव-पार्वती के विवाह काल से प्रज्वलित माना जाता है। मान्यता है कि इस अग्नि के समक्ष किया गया विवाह दांपत्य जीवन को स्थायित्व और मजबूती प्रदान करता है। मंदिर के सामने स्थित ब्रह्मशिला को भी शिव-पार्वती के विवाह का साक्षी स्थल माना जाता है।

इन सात शादियों में शामिल मेरठ से आए एक जोड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बर्फबारी के बीच सात फेरे लेते इस जोड़े की तस्वीरें और वीडियो मंदिर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी साझा किए गए हैं, जिन्हें बड़ी संख्या में लोग देख और साझा कर रहे हैं।

वसंत पंचमी के अवसर पर त्रियुगीनारायण मंदिर में हुए ये विवाह यह संकेत देते हैं कि पारंपरिक और आध्यात्मिक स्थलों पर विवाह का चलन लगातार बढ़ रहा है। बर्फ से ढके मंदिर परिसर में संपन्न हुए इन विवाहों ने एक बार फिर इस पौराणिक स्थल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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