gulmohar
निशिगंधा के फूल, मिट्टी के जलते दीये और चाँदनी रात में नदी किनारे ध्यानमग्न स्त्री

दिल को छूती मौन की गूँज…

“निशिगंधा की महक से जग उठा संसार, आंखों में बह रही गंगा और यमुना की धाराएँ। मिट्टी के दीपों की रौशनी में प्रार्थना और शांति पंचतत्व में विलीन हो रही हैं, और एक गीत हर दिल को छूते हुए गूँज रहा है।”

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गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान का दीप जला, रिश्तों की लौ दमक उठी”

विद्यालय में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम संगम बन गया। संस्कृत नाट्य प्रस्तुति, गीता श्लोकों का पाठ, ध्यान सत्र और गुरु पूजन जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। मुख्य अतिथि एसडीएम श्री बृजेश सक्सेना एवं हार्टफुलनेस टीम की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों को सम्मानित कर गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया।

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जिंदगी कुछ इस तरह…

एक समय था जब मेरी पसंद की एक शाम हुआ करती थी — चाय की प्याली, साथ में वो दो होंठ, और मेरे दिल के सबसे करीब वो शहर। अब सब कुछ छूट चुका है। मेरी क्यारी का गुलाब, मेरे गाल का गुलाल, मेरी आँखों का काजल, यहाँ तक कि मेरे होठों की तपिश और जिस्म पर चुम्बन की कल्पना तक — कोई और ले गया। दो जिस्म एक धड़कन बनकर जिसे मैं अपना मान बैठा था, वो अब किसी और के दिल में बस गया। मेरे हर अज़ीज़ को रक़ीब अपने नाम कर गया।

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सगवाली में LPG सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम,

 एक छोटी सावधानी, बड़े हादसे से बचाव

सगवाली में इंडियन ऑयल के “प्रेरणा अभियान” के तहत LPG सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. ग्रामीण महिलाओं को गैस के सुरक्षित उपयोग, सुरक्षा उपकरणों और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जानकारी दी गई.

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ऐ जिन्दगी

यह कविता एक आत्मीय संवाद की तरह है जिसमें जीवन से धीमे चलने की विनती की गई है। इसमें अकेलेपन, कठिन रास्तों और यादों की संगत को बहुत सहज भाव से व्यक्त किया गया है। कवयित्री कहती है कि जिन्दगी ने अपने हिस्से की धूप तो दी, पर अब वह ठंडी हवाओं और तन्हा रास्तों के बीच खुद को समेटे हुए है। बावजूद इसके, भीतर कहीं एक उम्मीद अब भी जीवित है कि शायद कोई राह ज़रूर होगी जो उसे उसके “जीवन” तक पहुँचा देगी।

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सागर से संवाद: संघर्ष, धैर्य और नई शुरुआत की प्रेरक कविता

सागर तुम्हीं दिखाओ कोई रास्ता…

लहरों, तूफ़ानों और गहराइयों के माध्यम से सागर से संवाद करती यह कविता जीवन के संघर्ष, धैर्य और हर हार के बाद नई शुरुआत का साहस देती है।

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क्या इंसानों के पास है सेवन्थ सेंस

-विज्ञान की सबसे कूल खोज, जो स्पर्श को नया अर्थ देती है सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज अब तक हम सिर्फ सिक्स्थ सेंस के बारे में ही जानते थे जो अदृश्य रूप से हमें संभावित घटना के बारे में आगाह कर देती थी.. आप सिक्स्थ सेंस से कुछ ऐसा महसूस कर सकते थे जो…

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रात में खाली बिस्तर और रहस्यमयी माहौल, लड़की के गायब होने का सस्पेंस दृश्य

अब क्या होगा…?

“रीता ने दरवाज़े की दोनों कुंडियाँ कसकर बंद कर दीं।आज उसने ठान लिया था—सच जानकर ही रहेगी। आधी रात को जब उसकी आँख खुली,
तो उसने घबराकर शेफाली के बिस्तर की ओर देखा…बिस्तर फिर से खाली था।रीता की सांसें थम-सी गईं दरवाज़ा तो अंदर से बंद था…तो आखिर शेफाली गई कहाँ?”

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Open diary on a wooden desk with yellowed pages and blurred handwritten words, sunlight falling on it, symbolizing confinement, emotional struggle, and the longing for freedom, with a distant view of open sky and flying birds through the window.

डायरी – कुछ कहानियां…

डायरी के पन्नों में कैद होती हैं वे कहानियां, जो जीवन की मजबूरी और अपमान की गवाही देती हैं। खुला आसमान और उन्मुक्त पंछियों की उड़ान उनके लिए सपना बन जाती हैं, परन्तु उनके शब्द अपनी बेबसी और तिरस्कार की कहानी बयाँ करते हैं।

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इंदौर के मानस भवन सभागार में आयोजित साहित्य सम्मान समारोह में पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि एवं आयोजक।

पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल सम्मानित

विश्व हिंदी प्रचारिणी महासभा और यूनिक यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा इंदौर में आयोजित साहित्यिक समारोह में कवयित्री पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को उनके साहित्यिक योगदान और काव्य प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।

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