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आँखों की ख़ामोशी

इन आँखों की ख़ामोशी में एक दबी हुई रागिनी है अनकहे शब्दों की, आधी छूटी कहानियों की। चेहरे पर ठहरी शांति और निगाहों में उठते-गिरते समंदर के बीच एक गहरा मंथन छुपा है। ये आँखें जैसे हर सवाल का जवाब अपने भीतर समेटे बैठी हों, मानो कह रही हों कि उन्होंने बहुत कुछ देखा है… पर कहने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है।

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कृष्ण-सुदामा जैसी सच्ची मित्रता का प्रतीक भावनात्मक दृश्य

मित्रता

मित्रता जीवन का वह अनमोल रिश्ता है, जो बिना किसी स्वार्थ के दिलों को जोड़ता है। यह एक ऐसा एहसास है, जिसमें विश्वास, सुकून और अपनापन हर पल साथ चलता है। सच्ची मित्रता न धन-दौलत देखती है, न ही ऊँच-नीच का भेद करती है—यह तो बस दिल से दिल का संबंध होती है। कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता हमें सिखाती है कि सच्चे मित्र हर परिस्थिति में साथ निभाते हैं। प्रेम जहाँ कभी-कभी कसक दे जाता है, वहीं मित्रता हमेशा सुकून और सहारा बनकर जीवन को सरल और सुंदर बना देती है।

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महिला की गरिमा और मानसिक पीड़ा को दर्शाती सशक्त कविता, जिसमें बिना शारीरिक स्पर्श के की गई हिंसक दृष्टि और नजरों के अपराध को शब्दों के माध्यम से उजागर किया गया है.

देह नहीं, आत्मा का अपमान

यह कविता एक स्त्री के उस अनुभव को गद्यात्मक रूप में सामने रखती है, जहां शारीरिक छेड़छाड़ के बिना भी उसकी गरिमा पर हमला किया जाता है. यह रचना बताती है कि किसी की घूरती, गंदी नजरें भी हिंसा का ही रूप होती हैं, जो मन को भीतर तक घायल कर देती हैं. कविता समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अपराध केवल स्पर्श से नहीं, बल्कि दृष्टि और मानसिक उत्पीड़न से भी होता है, और ऐसी हर सोच व व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.

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अस्थाई मजदूर

शहरों में काम करने वाले हम, जिन्हें “अस्थाई मजदूर” कहा जाता है, उनके परिवारों की कहानी अक्सर अनसुनी रह जाती है। उनकी पत्नियां अपने गांव में खेतों में मेहनत करके सब्ज़ियां उगाती हैं और उन्हें बेचकर अपने परिवार का गुजारा करती हैं। उनकी सरलता, उनकी मेहनत, उनका प्राकृतिक सौंदर्य—यह सब कभी-कभी चर्चा का विषय बनता है।

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उज्जैन की बेटी ने पोलैंड में बढ़ाया भारत का मान

मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के लिए गर्व का पल। नगर की ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर आयशा सना कुरैशी ने पोलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में ‘मिस इंडिया पोलैंड 2025’ का ताज जीतकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत और प्रदेश का नाम रोशन किया।

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बरसात में…

बरसात को जीवन, प्रकृति और मानवीय अनुभवों का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया गया है। बारिश की बूंदें पत्तों और फूलों पर मोती की तरह टपकती हैं, बिजली के तारों पर झिलमिलाती हैं और धरती में अमृत जैसी बूंदों के रूप में समा जाती हैं। वहीं, जर्जर मकान ढहते हैं और लोग अपने घरों और यादों को बचाने के लिए प्रयास करते हैं। शहर और गाँव की सड़कों पर बच्चे बारिश में खेलते हैं, नदियाँ अपने भीषण बहाव में सब कुछ बहा लेती हैं, और जानवर तथा पक्षी अपनी परिस्थितियों से जूझते हैं। इसके बीच, बरसात जीवन में रिश्तों, साहस और मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित करती है। कविता यह दर्शाती है कि बरसात का सौंदर्य और जीवन में उसकी भूमिका पहले जैसी रह गई है, लेकिन अब वह पहले जैसी रूमानी नहीं लगती।

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कमलसिंह का ठेलाः यादों की पीली दोपहरें

गांव से बड़े स्कूल में आना नया अनुभव था जेब में रोज़ के सिर्फ़ दस पैसे, और आधे इंटरवल में कमलसिंह बापू के ठेले से पाँच पैसे के दो केले ही हमारा भोजन। वही ठेला छात्रों की राजनीति का अड्डा था, जहाँ बापू कभी रावण, कभी विदूषक तो कभी किंगमेकर बनकर चमकते। उधार की सीमा पच्चीस पैसे तक थी, पर मुस्कुराकर केले थमा देने वाला उनका अपनापन आज भी स्मृति में ताज़ा है. छोटे दिनों की बड़ी गर्माहट जैसा।

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पुणे में रियल एस्टेट ठगी मामले की प्रतीकात्मक तस्वीर

पुणे में 40 लाख की ठगी, 40% रिटर्न का झांसा

रियल एस्टेट व्यवसाय में निवेश पर 40 प्रतिशत रिटर्न का लालच देकर एक महिला से 40 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है. इस प्रकरण में खडक पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

इस संबंध में रतनदेवी कांतिलाल ओसवाल (उम्र 54, निवासी जय भवानी सोसायटी, भवानी पेठ) ने खडक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है. इसके आधार पर पुलिस ने अनिल कटारिया (उम्र 60) और राहुल अनिल कटारिया (उम्र 35, निवासी प्रेशियस जेम सोसायटी, कोरेगांव पार्क) के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह घटना नवंबर 2022 से 13 अप्रैल 2026 के बीच हुई है.

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भगवान श्रीकृष्ण ज्ञान का दीप जलाकर अंधकार मिटाते हुए – अरदास हिंदी कविता

अरदास

जब अराजकता, अपराध और स्वार्थ से घिरी दुनिया में मानवता कराहने लगती है, तब मन भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता है कि वे पुनः अवतरित होकर ज्ञान का दीप जलाएँ, प्रेम का संदेश दें और इस धरा को शांति, करुणा तथा सद्भाव से आलोकित करें।

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सूर्योदय का शांत और ऊर्जा से भरा प्राकृतिक दृश्य

सूर्य वंदना

यह कविता प्रातःकालीन सूर्य की किरणों के माध्यम से प्रकृति के नवजीवन, ऊर्जा और जागृति का अत्यंत सुंदर चित्रण करती है। कवि ने मरीचि (सूर्य किरण) को समर्पित भावों के जरिए यह दर्शाया है कि किस प्रकार हर सुबह नई आशा, नई चेतना और सकारात्मकता लेकर आती है।

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