हो गई बर्बादी तूफ़ाँ के गुजर जाने के बाद
होश आया तो मिला क्या तेरे घर जाने के बाद
नाम मेहंदी का बड़ा मशहूर है गीतों में भी
पाती रंगत है मग़र दुल्हन संवर जाने के बाद
ज़िंदगी में मैंने पाये ज़ख्म इतने थे मगर
घाव था सबसे बड़ा तेरे मुकर जाने के बाद
देख लो जंगल कहीं इतिहास हो जाएं न ये
भूल पर पछताओगे सारे शजर जाने के बाद
अब कनक किससे कहे ये हाले दिल अपना सनम
प्यार का आता नशा है पर असर जाने के बाद

कनकलता तिवारी, प्रसिद्ध लेखिका मुंबई
