तुम मेरे हो
क्या हर प्रेम को नाम देना ज़रूरी होता है? यह कहानी अनन्या और आरव की है, जिनके बीच कभी मुलाकात नहीं हुई, फिर भी उनकी आत्मीयता हर दूरी से बड़ी बन गई। यादों, इंतज़ार और अनकहे प्रेम से सजी यह कहानी दिल को गहराई से छू जाती है।

क्या हर प्रेम को नाम देना ज़रूरी होता है? यह कहानी अनन्या और आरव की है, जिनके बीच कभी मुलाकात नहीं हुई, फिर भी उनकी आत्मीयता हर दूरी से बड़ी बन गई। यादों, इंतज़ार और अनकहे प्रेम से सजी यह कहानी दिल को गहराई से छू जाती है।
यह रचना प्रेम, स्मृति और इंतज़ार की मार्मिक कथा है। प्यार में पागल एक लड़की, जो समय के साथ आगे बढ़ गई है, लेकिन वादों की स्मृतियाँ आज भी बस स्टॉप पर खड़ी मिलती हैं। शीशा, काजल, मुस्कान और हर आती बस सब मिलकर अधूरे प्रेम और लौटकर न आने वाले वादे की एक संवेदनशील कविता रचते हैं।
ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। उस कमजोर सी बाती में कितनी…
यह कविता समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, एसिड अटैक, महिलाओं के प्रति हिंसा और दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रश्न उठाती है। साथ ही यह पुरुषों को राम और कृष्ण जैसे आदर्शों का अनुसरण कर नारी सम्मान की रक्षा करने का संदेश देती है।
यह कविता रिश्तों में पसरी हुई खामोशी और मन की गहराइयों में उपजी पीड़ा का चित्रण करती है। कवि कहता है कि यह खामोशी, मन को एक निर्जल और सूने कुएँ में धकेल देती है, जहाँ आकुलता और विकलता का साया छा जाता है। वहाँ न कोई चाहत होती है, न उम्मीद—नव अंकुर फूटने की संभावना भी नहीं।मन के किसी कोने में आशाएँ और अभिलाषाएँ सुंदर यादों की पोटली बनकर धरी रह जाती हैं। हर अहसास धीरे-धीरे पिघलकर पतझड़ के मौसम में बदल जाता है, और अंततः यह मन एक बांझ धरा की तरह फट पड़ता है।
मुंबई विश्वविद्यालय द्वारा शशिकला पटेल को समावेशी शिक्षा पर किए गए उत्कृष्ट शोध के लिए डॉक्टरेट (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने यह शोध गोखले कॉलेज ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च, परेल में प्रो. (डॉ.) प्रशांत काले के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। इस अवसर पर कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने उनके शोधकार्य में सहयोग और प्रेरणा प्रदान की।
गुड़ वाली चाय और मैं दोनों थोड़े देसी, थोड़े अनगढ़, पर पूरी तरह ईमानदार। जैसे गुड़ अपने रंग को धीरे-धीरे पानी में खोलता है, वैसे ही मेरी मिठास भी समय लेकर सामने आती है। सादगी में भी स्वाद छिपा होता है, यही हमें एक-दूसरे से जोड़ता है।
महिला काव्य मंच का अष्टम अंतरराष्ट्रीय वार्षिकोत्सव, मुंबई में 21 दिसंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। देश-विदेश की 25 इकाइयों की कवयित्रियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पुस्तकों का लोकार्पण, ‘मकाम’ ध्येय गीत की प्रस्तुति और 50 से अधिक कवयित्रियों का काव्य पाठ शामिल था। महाराष्ट्र इकाई को सर्वोत्तम प्रदेश इकाई सम्मान 2024 से नवाजा गया।