तुम मेरे हो

बारिश की शाम खिड़की के पास बैठी एक युवती, हाथ में चाय का कप और दूर देखते हुए अपने प्रिय को याद करती हुई।

रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते। वे धीरे-धीरे दिल में जगह बनाते हैं और फिर बिना कोई आहट दिए ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन जाते हैं।

अनन्या की ज़िंदगी भी बिल्कुल सामान्य थी। काम, ज़िम्मेदारियाँ और रोज़मर्रा की भागदौड़। उसने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन किसी अनजान से हुई दोस्ती उसके दिल की धड़कनों में बस जाएगी।

आरव से उसकी मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई थी। शुरुआत में बस सामान्य बातें होती थीं। कभी किसी कविता पर चर्चा, कभी किसी किताब पर, तो कभी यूँ ही दिनभर की छोटी-छोटी बातें। दोनों के बीच सैकड़ों किलोमीटर की दूरी थी, लेकिन बातचीत का सिलसिला ऐसा था कि दूरियाँ धीरे-धीरे मायने खोने लगीं।

दिन बीतते गए और दोस्ती गहरी होती गई।

अब अनन्या की सुबह आरव के “गुड मॉर्निंग” संदेश से शुरू होने लगी थी। रात को सोने से पहले उसकी आख़िरी नज़र भी फ़ोन पर उसी के संदेश का इंतज़ार करती थी।

दोनों ने कभी अपने रिश्ते को कोई नाम नहीं दिया था, लेकिन दिल अक्सर वहाँ पहुँच जाते थे, जहाँ शब्द पहुँचने से हिचकते हैं।

एक दिन बारिश हो रही थी।

खिड़की के पास बैठी अनन्या चाय पी रही थी। बारिश की बूँदें शीशे पर गिर रही थीं और अचानक उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

उसे याद आया कि आरव को बारिश कितनी पसंद है।

उसने फ़ोन उठाया, लेकिन फिर रख दिया।

वह जानती थी कि आरव काम में व्यस्त होगा।

फिर भी उसका मन उसी के आसपास भटकता रहा।

उसे एहसास हुआ कि अब हर मौसम में उसे आरव की याद आने लगी है।

सुबह की पहली किरण में…

शाम के ढलते सूरज में…

किसी गीत की धुन में…

किसी किताब की पंक्ति में…

हर जगह जैसे आरव का ही अक्स दिखाई देता था।

अनन्या कई बार खुद से पूछती, “क्या यह सिर्फ दोस्ती है?”

लेकिन दिल हर बार मुस्कुराकर जवाब देता, “अगर यह दोस्ती है, तो फिर यादें इतनी गहरी क्यों हैं?”

धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे की आदत बन गए।

जब किसी दिन बात नहीं होती, तो पूरा दिन अधूरा लगता।

जब फ़ोन पर उसकी आवाज़ सुनाई देती, तो अनन्या की सारी थकान जैसे पलभर में गायब हो जाती।

उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई थी।

न कभी साथ बैठकर चाय पी थी।

न कभी एक-दूसरे का हाथ थामा था।

फिर भी उनके बीच एक ऐसा अपनापन था, जो कई वर्षों पुराने रिश्तों में भी नहीं मिलता।

एक रात अनन्या छत पर बैठी आसमान को देख रही थी।

चाँद पूरा था और हवाएँ हल्की-हल्की चल रही थीं।

उसने आँखें बंद कीं और मन ही मन आरव को याद किया।

उस क्षण उसे एहसास हुआ कि प्रेम हमेशा पास रहने का नाम नहीं होता।

कभी-कभी प्रेम वह होता है, जब कोई इंसान हज़ारों किलोमीटर दूर होकर भी आपके हर ख़याल में शामिल हो जाए।

जब उसकी खुशी आपकी दुआ बन जाए।

जब उसका दुख आपकी चिंता बन जाए।

और जब उसका नाम सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाए।

उस रात अनन्या ने पहली बार अपने दिल की बात स्वीकार की।

उसे आरव से प्रेम हो गया था।

वह अनकहा प्रेम, जो किसी इज़हार का मोहताज नहीं था।

जो रोज़ की बातचीत में छिपा था।

जो हर “ख़याल रखना” में महसूस होता था।

जो हर इंतज़ार में धड़कता था।

आज भी जब कभी आरव दूर होता है और उसकी याद सताती है, तो अनन्या मुस्कुरा देती है।

क्योंकि उसे पता है कि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में मिलने के लिए नहीं, बल्कि हमारी धड़कनों में बस जाने के लिए आते हैं।

और जब तेरी याद सताए…

तो दिल बस यही कहता है-“दूरी चाहे जितनी भी हो, कुछ लोग हमेशा हमारे सबसे करीब रहते हैं।”

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