बारिश की शाम खिड़की के पास बैठी एक युवती, हाथ में चाय का कप और दूर देखते हुए अपने प्रिय को याद करती हुई।

तुम मेरे हो

क्या हर प्रेम को नाम देना ज़रूरी होता है? यह कहानी अनन्या और आरव की है, जिनके बीच कभी मुलाकात नहीं हुई, फिर भी उनकी आत्मीयता हर दूरी से बड़ी बन गई। यादों, इंतज़ार और अनकहे प्रेम से सजी यह कहानी दिल को गहराई से छू जाती है।

Read More