
सुमित्रा गुप्ता ‘सखी’ कल्याण, मुम्बई (महाराष्ट्र)
हाँ हाँ मैं एक विदुषी नारी हूँ
ईश्वर की अद्भुत रचना प्यारी हूँ
नर शब्द के अंतर्गत नारी
दो-दो मात्राओं से भारी हूँ
हां हां मैं एक नारी हूँ
सृष्टि की जननहारी हूँ
कई रूप धारे जग में मैंने
ईश्वर कीअद्भुत लीला न्यारी हूँ
गार्गी, अरूंधति, मदालसा सी
लोपामुद्रा,मैत्रेयी,अपाला, घोषा सी
वैदिक काल की विदुषी नारी हूँ
मैं कई रूपों में विस्तारित हूँ
मैं ही देव-त्रिदेव अवतारी हूँ
मैं ही अनसुइया,अदिति
अंजनी हूँ
ऋषि-मुनियों सी मैं तप करती
पार्वती सी कठोर व्रत धारी हूँ
यम चंगुल से पति को छुड़ा लाई
मैं सती-साध्वी सावित्री हूँ
दशरथ ने देव असुर संग्राम लड़ा
पति-प्राण बचाने वाली कैकयी हूँ
अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए
झांसी की वीरांगना लक्ष्मीबाई हूँ
अपने पुत्र का बलिदान दिया
त्याग मूर्ति माँ पन्नाधाय हूँ
निश्छल भक्ति प्रेम में डूबी जब
राधा,मीरा, गोपी , कर्मा बाई हूँ
कौशल्या,देवकी ,जशोदा सी
श्री राम, कृष्ण की जननी हूँ
विद्यादात्री माँ सरस्वती
बुद्धि विवेक जगाती हूँ
लक्ष्मी बन धन समृद्धि से
पोषण सभी का करती हूँ
मेरे कारण महाभारत है
मेरे कारण रामायण है
कुदृष्टि मुझ पर जो डाले
संहारक चंडी,दुर्गा, काली हूँ
मैं धरती बन अन्न उपजाती हूँ
मैं नदियां बन प्यास बुझाती हूँ
मैं गंगा की पावन धारा हूँ
गौमाता बन अमृतसम दूध पिलाती हूँ
घर-बाहर, अवनि,अम्बर तक
कर्मठता से पहचान बनाती हूँ
सखी, सहचरी, साथिन बनकर
घर-बाहर परिचम लहराती हूँ
मुझसे ही सारी सृष्टि है
मैं ही सारी सृष्टि में समायी हूँ
मेरे बिना सृष्टि नहीं होगी
घर-घर की रौनक बन छायी हूँ ।
कविता, पूजा, श्रद्धा, आरती
कई रुपों में मैं अतुलनीय हूँ
सखी रूप में आकर के मैं
नारी की गाथा सुनाने आई हूँ
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अति सुन्दर प्रस्तुति
बहुत ही सुन्दर 🙏
जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏🌹
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