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पूर्णिमा की रात वृंदावन के वातावरण में बांसुरी लिए कृष्ण और उनके सामने भावपूर्ण मुद्रा में खड़ी राधा, आध्यात्मिक प्रेम और एकात्म का प्रतीकात्मक दृश्य।

राधाकृष्ण: दो नहीं, एक भी नहीं

राधा और कृष्ण के इस काव्य-संवाद में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की अनुभूति बनकर सामने आता है—जहाँ दो अस्तित्व मिलकर राधाकृष्ण हो जाते हैं

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नारी केवल एक रिश्ता नहीं… वह सृष्टि की जननी, शक्ति, त्याग, भक्ति और साहस का स्वरूप है।

ईश्वर की सबसे अद्भुत रचना : नारी

यह ओजपूर्ण कविता नारी के विविध स्वरूपों—ममता, शक्ति, त्याग, भक्ति और साहस—का भावपूर्ण चित्रण करती है। गार्गी, सावित्री, लक्ष्मीबाई, मीरा और दुर्गा जैसी महान नारियों के माध्यम से स्त्री के अद्भुत अस्तित्व और उसकी अनंत ऊर्जा को दर्शाया गया है।

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माँ काली का करुणामय रूप, अपनी भक्त बेटी को आशीर्वाद देती हुई

मेरी प्यारी काली माँ

यह कविता माँ काली के साथ एक बेटी के गहरे आत्मीय रिश्ते को दर्शाती है, जहाँ देवी माँ कभी मित्र, कभी माँ, तो कभी मार्गदर्शक बनकर जीवन में शक्ति और सहारा देती हैं।

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बांसुरी बजाते हुए वृंदावन में खड़े श्रीकृष्ण का दिव्य और शांत स्वरूप

करुणा सागर

यह कविता श्रीकृष्ण के विविध रूपों और भक्तों के साथ उनके दिव्य संबंधों को दर्शाती है। मीरा से लेकर द्रौपदी तक, हर भक्त की पुकार में कृष्ण की करुणा और प्रेम झलकता है।

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नारी शक्ति पर कविता: अग्नि-सी आँखें, वज्र-सा संकल्प

भीतर की दुर्गा: एक मौन युद्ध

यह कविता नारी के बाहरी साहस और भीतर की आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है, जहाँ युद्ध बाहर नहीं बल्कि मन के अंधकार से होता है और हर प्रहार आत्मबोध की ओर एक कदम बन जाता है।

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भगवान हनुमान भक्तों को आशीर्वाद देते हुए, परिवार की रक्षा करते हुए

संकटमोचन हनुमान

हनुमान जी को माता-पिता समान मानकर यह कविता उनके संरक्षण, दया और शक्ति की प्रार्थना करती है, जहां भक्त जीवन के दुखों से पार लगाने की विनती करता है.

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हे केशव, तेरी यह कैसी माया?

कभी साधारण जप सा लगता कृष्ण-नाम आज अचानक मन में तरंग बनकर उठा। जैसे ही भाव की एक बूंद हृदय में गिरी, भीतर का सारा सूखापन हर गया। लगा मानो केशव स्वयं दया कर उपस्थित हो गए हों। बरसों की पुकार, प्रतीक्षा और तड़प का उत्तर आज मिला। रोम-रोम भक्ति से भीग उठा यही क्षण जन्म का सार्थक होना है।

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