
सुमन दीक्षित, प्रसिद्ध लेखिका
नन्ही सी…
प्यारी सी चिड़िया,
चीं-चीं, चूँ -चूँ करती,
जब देखो फुदकती रहती,
चोंच में तिनका दबाए…
कभी इधर से कभी उधर !!
दरख्त कटते,
जा रहे दिनों-दिन..
खो ना जाए इनमें कहीं,
इनका मटकता चुलबुलापन,
और कर्णप्रिय मधुर कलरव !
नैतिक जिम्मेदारी होगी,
समस्त मानव जाति की,
पर्यावरण का हो…
भली-भाँति संरक्षण..!
रोज़ाना इन्हें दाना दे दो,
दोने में थोड़ा सा पानी..
बसेरा करने को सदा..
रहतीं हैं ये तत्पर….!!!
पर पर्यावरण के,
संतुलन बिगड़ने का,
बेहद पड़ा है प्रभाव बुरा…
मासूम सी इस नन्ही जान पर..!
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रचना को प्रकाशित करने के लिए बहुत आभार आपका Suresh जी 🙏