एक पेड़, दो तस्वीरें और दर्द
एक पेड़ को बचाने के लिए घर की गैलरी की बनावट बदलने वाले परिवार की कहानी. बंसीलाल परमार की दो तस्वीरें प्रकृति प्रेम, संरक्षण और एक पेड़ के ठूंठ बन जाने की पीड़ा बयां करती हैं.

एक पेड़ को बचाने के लिए घर की गैलरी की बनावट बदलने वाले परिवार की कहानी. बंसीलाल परमार की दो तस्वीरें प्रकृति प्रेम, संरक्षण और एक पेड़ के ठूंठ बन जाने की पीड़ा बयां करती हैं.
लकड़ी का सम्मेलन’ एक सशक्त समकालीन हिंदी कविता है, जिसमें सभ्यता, पर्यावरण और मनुष्य के पाखंड पर तीखा व्यंग्य किया गया है। कविता बताती है कि पेड़ों की रक्षा के भाषण अक्सर उन्हीं लकड़ियों के बीच दिए जाते हैं, जिनकी देह कभी जंगल हुआ करती थी।
स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणों से आलोकित यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य, पक्षियों के मधुर कलरव, उषा की मनोहारी लालिमा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह रचना प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण की भावना जागृत करती है।
“नीला अम्बर, स्वच्छ पवन है” कविता प्रकृति की सुंदरता, जैव विविधता और धरती माता के प्रति मानव के कर्तव्यों को दर्शाती है। यह रचना पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।
भीषण गर्मी और बढ़ते प्रदूषण के दौर में टेरेस गार्डन एक प्रभावी और सरल समाधान बनकर उभर रहा है। यह न केवल घर की छत को ठंडा रखने और तापमान नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि शुद्ध हवा, हरियाली और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। छोटे-छोटे पौधों और किचन गार्डन के माध्यम से हम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
रीमा धुएँ और धूल से भरे आसमान को निहारते हुए सोचती है—क्या स्वच्छ हवा केवल ऊँची इमारतों में रहने वालों का अधिकार है? झोपड़ियों में रहने वाले लोग भी तो उसी धरती और हवा का हिस्सा हैं। एक नन्हा पौधा उसे उम्मीद देता है कि अगर हम चाहें, तो ज़हरीली हवाओं के बीच भी जीवन को बचाया जा सकता है।