विश्वभर में मनाया गया इंटरनेशनल मीटलेस डे

साधु वासवानी की 146वीं जयंती पर करुणा और शाकाहारी संदेश का उत्सव पुणे से सुरेश परिहार की रिपोर्ट करुणा, शांति और शाकाहारी जीवनशैली के संदेश को समर्पित इंटरनेशनल मीटलेस डे इस वर्ष भी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर मनाया गया। गुरुदेव साधु टी. एल. वासवानी की 146वीं जयंती के अवसर पर दुनियाभर में आध्यात्मिक…

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धरती का उजाला, आसमान से मिला तोहफ़ा : सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि पृथ्वी के भविष्य की रक्षा का संकल्प है। जब हम सूर्य की किरणों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं, तो न सिर्फ़ प्रदूषण घटाते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण भी सुरक्षित करते हैं। गाँवों से लेकर शहरों तक सौर पैनलों की चमक आज विकास की नई दिशा दिखा रही है। यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत—तीनों का अद्भुत संगम है।

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मैं जब पेड़ लगाता हूँ

प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसमें कवि ने पेड़ लगाने के आनंद और उससे जुड़ी संवेदनाओं को सहज बालसुलभ भाव में प्रस्तुत किया है। कविता यह संदेश देती है कि पेड़ केवल फल या छाया ही नहीं देते, बल्कि वे मनुष्य और जीव-जंतुओं — सबके जीवन का आधार हैं। दादी के स्नेहिल शब्दों से लेकर झूले पर झूलने की कल्पना तक, हर पंक्ति में प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध झलकता है। यह रचना बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाली है।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए पुणेकरों ने चलायी साइकिल

पुणे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर राज्यसभा सांसद प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी की पहल से आयोजित ‘पुणे ऑन पेडल्स’ साइकिल रैली और वॉकथॉन में हजारों पुणेकरों ने भाग लेकर शारीरिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर 75 जरूरतमंद बच्चों को साइकिल वितरण भी किया गया।

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हर कदम, स्वच्छता की ओर

भारत को स्वच्छ बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति मिलकर कदम बढ़ाए और दिल से प्रयास करे तो कचरा चुनकर, गीले और सूखे कचरे को अलग रखकर हम अपने देश को स्वच्छ बना सकते हैं। शुद्ध हवा और निर्मल पानी हमारे जीवन के लिए अनिवार्य हैं, इसलिए प्रदूषण को रोकने और जल की प्रत्येक बूँद को बचाने का संकल्प लेना होगा। प्लास्टिक का उपयोग कम करना, कपड़े की थैली अपनाना और वृक्ष लगाना जैसे छोटे-छोटे कदम पर्यावरण को बचा सकते हैं। यदि हम सब मिलकर यह अभियान चलाएँ तो धरती को हरी-भरी दुल्हन की तरह सजा सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित भारत बना सकते हैं।

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उखड़ने के बाद भी ना हारा… देखिए इस पीपल की जिद!

जड़ों से उखाड़े जाने के बाद भी मुस्कुराना कैसे संभव है, यह सांवेर रोड की पहाड़ी पर लगाए गए पीपल के तने से सीखा जा सकता है। बिना शाखाओं के रहकर भी उसने हरियाली का संदेश दिया है। नगर निगम की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण बचाने की मिसाल है, बल्कि पेड़ ट्रांसप्लांटेशन की एक प्रेरणादायक कहानी भी है।

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