भारत को स्वच्छ बनाना है।
चल, हाथ बढ़ा और कदम मिला,
हर दिल से मैल मिटाना है,
यहां-वहां से कचरा चुनकर,
भारत को स्वच्छ बनाना है।
शुद्ध हवा, पानी भी निर्मल,
है बहुत ज़रूरी हम सबको,
हम ही बचा सकते हैं मिलकर,
प्रकृति के निष्छल मन को।
जहां-तहां कचरा न फेंको,
खुद को ये समझाना है,
गीला कचरा, सूखा कचरा,
अलग-अलग रखवाना है।
चल, हाथ बढ़ा और कदम मिला,
भारत को स्वच्छ बनाना है।
गांवों में, हर गलियों में,
स्वच्छता की ज्योति जलानी है,
नदियों का पानी हो निर्मल,
जलधारा शुद्ध बनानी है।
जल प्रदूषण को रोकने का,
अब हमको संकल्प उठाना है,
पानी को न व्यर्थ बहाएं,
हर बूँद सहेजे जाना है।
चल, हाथ बढ़ा और कदम मिला,
भारत को स्वच्छ बनाना है।
कपड़े की थैली उपयोग करो,
प्लास्टिक से बचते जाना है,
वृक्ष लगाकर, वृक्ष बचाकर,
प्रकृति को फिर सजाना है।
बना के धरती को धानी,
दुल्हन सा सजाना है।
पर्यावरण बचाओ बच्चों,
यह संदेश फैलाना है।
चल, हाथ बढ़ा और कदम मिला,
भारत को स्वच्छ बनाना है।

डॉ.शशिकला पटेल, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई

गांव का वर्णन , दिल छूने वाला है
वहां क्या रखा है? किसी का कुछ नहीं , कोई नहीं
किसी का पूरा जीवन और उसकी पुराने बक्से में बन्द भोले बचपन की यादें !
मां और दादी का कुछ निवाले खिलाने के लिए
रात -दिन मनुहार और कहानियों का अम्बार
सब यादें जोड़ों में हैं जैसे पगडण्डी और धूल
चौपाल और गर्मजोशी, कुएं और पानी , नीम और ठंडी छांव । हर जोड़ा एक याद , एक कहानी लिए हुए जीवन्त है । लेखक से घर – गांव कभी अलग – दूर नहीं हो सकता ।
बहुत मार्मिक चित्रण ।