
डॉ. राकेश चंद्रा, प्रसिद्ध लेखक, लखनऊ
सूर्य हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह नहीं, बल्कि एक तारा है। इससे निकलने वाला प्रकाश एवं ऊर्जा पृथ्वी पर जीवन के संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा अक्षय है, अर्थात् कभी समाप्त न होने वाली।
वर्तमान समय में विश्व पर्यावरण प्रदूषण के भयंकर संकट से जूझ रहा है, जिसमें ग्रीनहाउस गैसों का विशेष योगदान है। इन गैसों के उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी विकट परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) द्वारा प्रतिवर्ष 193 देशों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की जाती है, जिसमें जलवायु परिवर्तन पर विचार-विमर्श कर भविष्य की रणनीति तय की जाती है।
इन सामूहिक निर्णयों के अंतर्गत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि विश्व के सभी देश मिलकर वर्ष 2070 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण करते हुए “नेट-जीरो उत्सर्जन” का लक्ष्य प्राप्त करेंगे। इसके लिए ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों के स्थान पर नवीकरणीय या अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
भारत में वर्ष 2014 में वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर वर्ष 2026 तक कर दिया गया है। भारत ने विश्व पटल पर “एक सूरज, एक विश्व, एक ग्रिड” की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसके अंतर्गत विश्वभर की सौर ऊर्जा को एक अंतरराष्ट्रीय ग्रिड में एकत्रित कर संरक्षित करने का संकल्प लिया गया है। इस दिशा में वर्ष 2020 में अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस, भारत सरकार एवं विश्व बैंक के मध्य एक समझौता ज्ञापन (MoU) संपन्न हुआ। यह एलायंस भारत की पहल पर गठित हुआ है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
भारत में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु अनेक परियोजनाएँ संचालित हैं। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पी.एम.-कुसुम) के अंतर्गत किसानों को अपने सिंचाई पम्पों को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए सरकारी सहायता दी जाती है। इसी प्रकार केंद्र सरकार द्वारा सोलर पार्क योजना उद्यमियों को प्रोत्साहन हेतु चलाई जा रही है।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक राज्य में एक सोलर सिटी विकसित करने की योजना पर भी कार्य चल रहा है। वर्ष 2010 में स्थापित राष्ट्रीय सोलर मिशन का उद्देश्य भी सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन देना है। इसी क्रम में भारत सरकार की रूफटॉप सोलर योजना, जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 में हुई, उल्लेखनीय है। इसके तहत आवासीय, संस्थागत एवं सामाजिक क्षेत्रों में घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगाने हेतु सब्सिडी एवं अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।
हाल ही में 13 फरवरी 2024 को भारत सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना के अंतर्गत एक करोड़ लाभार्थियों को 300 यूनिट बिजली निःशुल्क दिए जाने का प्रावधान है। साथ ही लाभार्थियों को अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। 29 फरवरी को केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना के लिए ₹75,000 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को एक किलोवाट सोलर संयंत्र लगाने पर ₹30,000 की सब्सिडी दी जाएगी।
वर्तमान में सौर पैनल, बैटरी एवं अन्य उपकरणों का अधिकांश भाग विदेशों से आयातित होता है, जिससे संयंत्र महंगे सिद्ध होते हैं। यद्यपि अब स्वदेशी उपकरणों का निर्माण आरंभ हो चुका है, फिर भी आत्मनिर्भर बनने में समय लगेगा। इन उपकरणों के रखरखाव हेतु पर्याप्त सर्विस सेंटरों की स्थापना उपभोक्ताओं के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।
वर्षाकाल या घने कोहरे की स्थिति में कई दिनों तक सूरज दिखाई नहीं देता, जिससे सौर ऊर्जा की उपलब्धता प्रभावित होती है। अतः ऊर्जा के भंडारण (स्टोरेज) पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है ताकि उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में सौर ऊर्जा सबसे अधिक किफायती, स्वच्छ और सुलभ स्रोत है। भारत सरकार द्वारा इस क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास आने वाले समय में सौर ऊर्जा के व्यापक प्रसार और पर्यावरण संरक्षण दोनों में मील का पत्थर साबित होंगे।
