
अर्पणा सिंह “अर्पी”, रांची
रीमा हतोत्साहित-सी खड़ी थी। उसकी नज़रें अपलक आसमान में उठते धुएँ और धूल के गुबार पर टिकी थीं। मन ही मन वह सोच रही थी कब समझेंगे ये ऊँची इमारतों में रहने वाले लोग? कब उन्हें एहसास होगा हमारे दर्द का, जो झोपड़ियों में हर असुविधा के बीच जीने को मजबूर हैं?
वह खुद से सवाल करती है क्या हमारे रगों में खून नहीं दौड़ता? क्या हमें स्वस्थ रहने का अधिकार नहीं? हमारी सेहत का ध्यान रखना क्या सिर्फ हमारा ही कर्तव्य है, या समाज का भी कोई दायित्व बनता है?
उसकी नज़र पास की उस पथरीली, कंकड़ों से भरी मिट्टी पर जाती है, जहाँ उसने कुछ समय पहले एक छोटा-सा बीज लगाया था। आज वही बीज अंकुरित होकर एक नन्हा पौधा बन चुका था। रीमा के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान तैर जाती है।
“तुम लोगों से तो ये मिट्टी बेहतर है,” वह बुदबुदाई, “कम से कम यह जीवन तो देती है… सांस लेने के लिए शुद्ध हवा तो तैयार करती है।”
उसका मन भीतर ही भीतर आक्रोश और पीड़ा से भर उठा। वह जैसे पूरे शहर से बात कर रही हो-“अब भी समय है, संभल जाओ। शहर को केवल कंक्रीट की दीवारों से मत सजाओ। अपने आसपास हरियाली बढ़ाओ। यह धरती घुट रही है… और इसके साथ हम भी।” रीमा की आवाज़ भले ही धीमी थी, लेकिन उसके शब्दों में एक गूंज थी एक ऐसी पुकार, जो हर उस व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए, जो विकास के नाम पर प्रकृति को नजरअंदाज कर रहा है।
लेखिका के बारे में-
अर्पणा सिंह
एक सशक्त और बहुआयामी रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी संवेदना, समाज और सरोकारों का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने शिक्षिका के रूप में अपने ज्ञान और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाया।लेखन के क्षेत्र में उनकी पहचान एक सशक्त कवयित्री और संवेदनशील कथाकार के रूप में बनी है। नवीन कदम छत्तीसगढ़ की काव्य प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया। माँ शारदे मंच द्वारा ‘लोक संस्कृति साधक सम्मान’ से सम्मानित होना उनकी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। ‘शब्द सिंधु’ द्वारा सर्वश्रेष्ठ रचनाकार और WOW द्वारा ‘शानदार शायर’ का ख़िताब उनकी साहित्यिक प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करता है।उनकी रचनाएँ प्रभात खबर, दैनिक जागरण, शुभम संदेश और आई नेक्स्ट जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।साहित्योदय के अंतर्गत उन्हें लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है, जो उनकी रचनात्मक उपलब्धियों का वैश्विक सम्मान है।‘काव्यांजली’, ‘दहलीज़ से आगे’, ‘मनस्वी’ और ‘कृष्णायण अखण्ड काव्यार्चन’ जैसे संकलनों में उनकी रचनाएँ पाठकों को गहराई से प्रभावित करती हैं। अर्पणा सिंह आज भी अपनी लेखनी के माध्यम से समाज, संस्कृति और मानवीय भावनाओं को सशक्त स्वर दे रही हैं।
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