Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
एक भूखा बच्चा रोटी की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देखता हुआ

भूख

यह मार्मिक कविता भूख, ग़रीबी और सामाजिक विषमता की उस कठोर सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ एक ओर भोजन की बर्बादी है और दूसरी ओर एक निवाले के लिए तड़पते लाखों चेहरे। कविता मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का गहरा संदेश देती है।

Read More
घने विशाल पेड़ की गहरी छाया में धूप के लिए संघर्ष करते छोटे पौधे, विकास और असमानता का प्रतीक दृश्य।

विशालता की छाया में दम तोड़ता विकास

यह लेख हमारे समय के उस भ्रम को उजागर करता है जिसमें “बड़े होने” को ही “बेहतर होने” का पर्याय मान लिया गया है, और बताता है कि कैसे यही सोच नई प्रतिभाओं और अवसरों को दबा देती है।

Read More
प्रदूषित शहर में झोपड़ी के पास खड़ी महिला धुएँ से भरे आसमान को देखते हुए

ज़हरीली हवाएँ

रीमा धुएँ और धूल से भरे आसमान को निहारते हुए सोचती है—क्या स्वच्छ हवा केवल ऊँची इमारतों में रहने वालों का अधिकार है? झोपड़ियों में रहने वाले लोग भी तो उसी धरती और हवा का हिस्सा हैं। एक नन्हा पौधा उसे उम्मीद देता है कि अगर हम चाहें, तो ज़हरीली हवाओं के बीच भी जीवन को बचाया जा सकता है।

Read More