घोंसले से पहली बार उड़ान भरते गौरैया के बच्चे, पास में उनके माता-पिता और खिड़की से आती सुनहरी सुबह की रोशनी।

खाली घोंसला, भरा हुआ मन

घर के एक छोटे से कोने में बसे गौरैया के घोंसले ने जीवन का ऐसा पाठ सिखाया, जिसे शायद बड़ी-बड़ी किताबें भी नहीं सिखा पातीं। नन्हे पंखों की पहली उड़ान, माता-पिता का निस्वार्थ प्रेम और फिर सही समय आने पर उन्हें खुले आसमान के हवाले कर देना— यही प्रकृति का सबसे सुंदर संदेश है। गौरैया के बच्चों की विदाई ने यह एहसास कराया कि सच्चा प्रेम किसी को बाँधता नहीं, बल्कि उसे इतना सक्षम बनाता है कि वह आत्मविश्वास के साथ अपनी राह चुन सके।

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खिड़की पर तिनके लिए बैठी एक नन्ही गौरैया, जो आशा और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक दिखाई दे रही है।

गौरैया

खिड़की पर आकर चहकती गौरैया केवल एक पक्षी नहीं लगती, बल्कि जीवन की जिद और आशा का जीवंत रूप प्रतीत होती है। नन्ही चोंच में तिनके दबाए वह जैसे हर बार याद दिलाती है कि टूटे हुए घोंसले भी फिर से बसाए जा सकते हैं। उसकी चपल उड़ान और निरंतर प्रयास उस मन से संवाद करते हैं, जो उदासी और पीड़ा के बोझ तले थक चुका है। यह कविता गौरैया के माध्यम से जीवन, आशा और भीतर फिर से घर बनाने की इच्छा को संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती है।

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छोटी गौरैया चिड़िया तिनका लेकर घोंसला बनाती हुई

गौरैया

“गौरैया” एक संवेदनशील और सरल भाषा में लिखी गई ऐसी कविता है, जो नन्हीं चिड़िया के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का गहरा संदेश देती है। यह कविता हमें उस दुनिया की याद दिलाती है, जहाँ कभी गौरैया की चहचहाहट हर आँगन की पहचान हुआ करती थी।

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