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बीज से वृक्ष तक: विनम्रता की यात्रा

बीज से अंकुरित होकर वृक्ष बनना सिर्फ़ बढ़ना नहीं
यह धूप, बारिश, तूफ़ान और समय का कठोर परीक्षण है। अहंकारी डालियाँ टूट जाती हैं, घमंडी पत्ते उड़ जाते हैं, पर जड़ों वाला पुराना वृक्ष अडिग खड़ा रहता है। उसी की छाँव में नई कोंपलें जन्म लेती हैं मजबूत, विनम्र, और जीवन का नया सबक लिए हुए।

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बारिश में खिड़की के पास खड़ी एक युवती, हाथ में सूखा गुलाब लिए दूर क्षितिज की ओर देखती हुई। उसके चेहरे पर बिछड़ने की पीड़ा और पुरानी यादों की गहरी भावनाएँ झलक रही हैं।

…कि मुझे सब याद है

कुछ रिश्ते भले ही जीवन से चले जाएँ, लेकिन उनकी यादें हमेशा साथ रहती हैं। यह कविता बिछड़ने के बाद भी दिल में बसे प्रेम, अधूरी मुलाकातों, बारिश की स्मृतियों और अनकहे एहसासों को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

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राम मंदिर के पास श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच ग्राहकों का इंतजार करते अयोध्या के स्थानीय दुकानदार

चढ़ावे के विवाद का असर: श्रद्धालु कम हुए

अयोध्या के छोटे कारोबारियों पर असर अब साफ दिखाई देने लगा है। स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों और ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या घटने से उनकी आय प्रभावित हुई है। हालांकि कुछ लोग बारिश और स्कूल खुलने जैसे मौसमी कारणों को भी इसकी वजह मान रहे हैं।

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अनकहे प्रेम का भाव दर्शाता एक शांत दृश्य, जहाँ दो लोग बिना बोले आँखों से गहरा भाव साझा कर रहे हैं, वातावरण में मोगरे की हल्की सुगंध और कोमल शांति व्याप्त है।

तुम्हारा–मेरा प्रेम

उस प्रेम की कथा कहती है जो शब्दों का मोहताज नहीं होता। आँखों की गहराइयों में ठहरा, निःस्वार्थ और समान पीड़ा में बंधा यह प्रेम मोगरे की सुगंध की तरह मन में सहेजा रहता है धीरे-धीरे फैलता हुआ, आज भी अव्यक्त, फिर भी अटूट और अभेद्य।

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वो पल…

सपना चन्द्रा , कहलगांव, भागलपुर (बिहार) कुछ तो था उस पल में —चाँद, कबूतर, सफेद बादल,लालिमा ओढ़े उगता सूरज,और टिप-टिप बरसतीबूँदों की रिमझिम बरसात,इंद्रधनुष की सतरंगी पट्टी। जाने कब इन आँखों में कैद हुईचलती-फिरती हरेक तस्वीर,चाहा उतार लूँ कागज परएक सुंदर सी तस्वीर,उस छोर को याद करते हुएजिससे मैं बंधी थी,मगर उलझी हुई सी। पर…

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क्षणभंगुर जीवन मेरा…

नीलम राकेश, प्रसिद्ध लेखिका, सीतापुर रोड लखनऊ अपने बरामदे में आराम कुर्सी पर बैठे शेलेन्द्र कुमार सिन्हा अपलक एक छोटे बादल के टुकड़े को आकाश में अकेले अठखेली करते देख रहे थे। उनके अन्तस का एकाकीपन पूरी तीव्रता के साथ उनके ऊपर हावी था। अपना जीवन उन्हें इस निरीह क्लांत बादल के टुकड़े जैसा प्रतीत…

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बस अब और नहीं 

सान्वी ने सुबह की सारी व्यस्तताओं से निवृत्त होकर बालकनी में बैठकर बारिश की बूंदों को निहारना शुरू किया। उसी समय उसके भीतर लंबे समय से चल रहे संघर्ष और आंतरिक तूफ़ान ने नया रूप ले लिया। अतीत के घाव, निराशा और खुद से होने वाली आत्मग्लानि ने उसे झकझोर दिया। और तभी उसने ठान लिया. बस, अब और नहीं!”उसने अपने अनवरत युद्ध को विराम देने का साहस जुटाया, और अपने अंतर्मन पर पूर्ण नियंत्रण पाकर आत्मा की जीत का अनुभव किया।

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कर्म हम ऐसा करें…

हर दिन हमारे जीवन में एक नई उमंग और तरंग लेकर आता है। यदि हम अपने कर्म ऐसे करें कि दुनिया हमें देखकर दंग रह जाए, तो यही सच्ची सफलता है। राह में चाहे कांटे हों या शूल, परिस्थितियाँ प्रतिकूल क्यों न हों, सच्चा कर्मवीर अंजाम से नहीं डरता और भूल को कभी दोहराता नहीं। उसका हर काम करने का एक अनोखा और निराला ढंग होता है।

उन्नति की राह पर बढ़ते रहना ही जीवन का ध्येय होना चाहिए। सामने हिमशिखर खड़े हों तो भी उनसे टकराने का साहस रखना चाहिए। आकाश को छूने का जज़्बा होना चाहिए, जैसे उड़ती हुई पतंग। कर्मपथ पर चलते हुए प्रण कभी डगमगाना नहीं चाहिए और न ही ईमान बिकना चाहिए। नए मुकाम हासिल करना और सिर को कभी न झुकाना ही सच्ची जीत है। कर्म ही हमारी काशी-मथुरा हैं, कर्म ही हमारा हाजी मलंग है। यही कर्म हमारी पूजा है, यही कर्म हमारी पहचान है।

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अहंकार में डूबा व्यक्ति, चारों ओर धूल और धुंध, पीछे जलती हुई बगिया और प्रतीकात्मक अराजकता

आत्ममुग्धता

धूल जब गगन को छूती है, तब भी एक कंकर अपनी ही धुन में डूबा रहता है यही आत्ममुग्धता है। इस दुनिया में कई लोग अपने अहंकार के कहकहे लगाते हैं, बिना यह देखे कि उनकी ही कारगुजारियाँ उनके आसपास के चमन को जला रही हैं। वे उस बगिया को बारूद बना देते हैं, जिसे प्रेम और बलिदान से सींचा गया था यही हमारी सामाजिक विडंबना है।

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शांत प्राकृतिक वातावरण में झील किनारे बैठी एक युवती, जो गहरे विचारों में डूबी हुई आत्म-चिंतन कर रही है

गहराइयों में छिपी सच्चाई

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई जीवन की सच्चाई अक्सर सतह पर नहीं, उसकी गहराइयों में छिपी होती है। इसे समझने के लिए हमें कभी-कभी ठहरकर अपने भीतर झांकना पड़ता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसा ही अनुभव आया, जिसने मुझे जीवन की गहराई से परिचित कराया। यह उन दिनों की बात है जब सब कुछ…

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