Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

कहाँ गए वो लोग

पुराने समय में लोग आपसी मान-सम्मान और पश्चाताप की भावना से भरे रहते थे। जब भी बात मान की आ जाती, तो वे तुरंत झुक जाते और मेल कर लेते। भाई आपस में चाहे कितना भी झगड़ लेते, लेकिन मातृ प्रेम के कारण तुरत ही एक हो जाते और थोड़ी देर रूठकर वापस घर लौट आते।

उस दौर में यदि पड़ोस की दीवारें भी खड़ी हो जातीं, तो लोग उचक-उचक कर झांकते और चूल्हा जलता देखकर आग मांग लेते। गलती हो जाने पर दिन-रात प्रायश्चित करके खुद को सुधारने का प्रयास करते। काली रातों में जब गीदड़ गुर्राते और कोई हल्की सी आवाज़ भी आती, तो गाँव के लोग तुरंत चौकन्ने होकर प्रहरी बन जाते।

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आसरा

पने भीतर के अदृष्ट संसार और भावनाओं की गहराई को व्यक्त करती हैं। यह कविता यादों, अनुभवों और उन कहानियों की प्रतीक है जो हमारे मन में ठहरी रहती हैं—जैसे कवियों की स्मृतियाँ, वर्जीनिया का मौन, मीरा का विस्मय और अजनबी महिलाओं की अधूरी चिट्ठियां। इस अदृश्य संसार के बीच, कवयित्री अपने विचारों को हर रात धीरे-धीरे खो देती हैं, जैसे कोई ज्योत अपने ही प्रकाश से थक गई हो। अंततः, एक प्रिय व्यक्ति की निस्पंद धड़कनों में मिलने वाला आसरा उसे थके हुए मन को सहारा देने और हृदय का भार साझा करने की अनुभूति कराता है।

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बलात्कार के केस की धमकी तीन युवकों से वसूली भारी रकम

,सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ाकर एक युवती ने युवक को अपने घर बुलाया और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. इसके बाद बलात्कार का झूठा केस दर्ज करने की धमकी देकर उससे पौने दो लाख रुपये वसूले. जब उसने ५ लाख रुपये की मांग पूरी नहीं की तो उसके खिलाफ बलात्कार और एट्रोसिटी का गंभीर मामला दर्ज कर दिया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि इसी तरह इस युवती ने नांदेड़ और कंधार के दो अन्य युवकों के खिलाफ भी बलात्कार और अट्रोसिटी का मामला दर्ज करवाया है.

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ratna writer

डॉ. रत्ना मानिक : एक संवेदनशील लेखिका

डॉ. रत्ना मानिक एक ऐसी हिंदी लेखिका हैं, जो समाज की पीड़ा, मानवीय संवेदनाओं और ज्वलंत मुद्दों को अपनी सशक्त और स्पष्ट लेखनी के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर 16 घंटे का जाम, गैस रिसाव जारी, यात्री बेहाल

जाम में फंसी जिंदगी

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में गैस टैंकर पलटने से 24 घंटे से अधिक समय तक यातायात ठप रहा. प्रोपाइलीन गैस का रिसाव अब तक नहीं रुक पाया, जिससे 10 किमी लंबा जाम लगा है और सैकड़ों यात्री बिना खाना-पानी फंसे हुए हैं. पुलिस के अनुसार शाम तक राहत मिलने की संभावना है.

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मैं हूं सूखी लकड़ी..

मैं सूखी लकड़ी हूं, जीवन में हितकारी और हर रूप में कल्याण फैलाने वाली। मैं शिव के मस्तक पर सजती हूं, कृष्ण की बांसुरी की तान में झूलती हूं, घरों में झूले और पलनों का आधार बनती हूं, और रोगियों का उपचार भी करती हूं। हर कदम पर मेरी उपस्थिति है—सृष्टि, श्रद्धा और जीवन के हर पहलू में। यही मेरी शक्ति और पहचान है।

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शाम के समय झील के किनारे टहलती महिला और दूर खड़ा एक प्रेमी जोड़ा

 झील के किनारे

झील के किनारे रोज़ प्रेमी जोड़ों को देखकर लगता था कि यहाँ सिर्फ नई जोड़ियाँ बनती हैं. लेकिन एक शाम सुनी गई बातचीत ने एहसास कराया कि कुछ रिश्ते जहाँ शुरू होते हैं, वहीं कुछ बसी-बसाई गृहस्थियाँ भी टूटने लगती हैं.

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रात की खामोशी में डायरी के सामने बैठी एक भावुक स्त्री, अधूरी मोहब्बत और अनकहे सवालों में डूबी हुई।

मन का कोरा पन्ना

कुछ प्रश्न जीवन में हमेशा अनुत्तरित रह जाते हैं। “मन का कोरा पन्ना” प्रेम, पीड़ा, विवशता और अनकहे एहसासों की ऐसी ही संवेदनशील यात्रा है, जहाँ शब्दों से अधिक खामोशी बोलती है।

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कारगिल विजय दिवस पर माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच की राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी

कारगिल विजय दिवस पर ‘माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत’ की राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत द्वारा 27 जुलाई को राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में देशभर के 200 से अधिक वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्यकार अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। आयोजन में प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं अतिथि भी सहभागिता करेंगे। मंच का उद्देश्य साहित्यिक प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान कर साहित्य और राष्ट्रभावना को सशक्त बनाना है।

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