अभिलाषा

दिल टूटने के बाद आत्मनिर्भर बनती महिला की भावनात्मक स्थिति टूटकर भी जो खुद को फिर से बना ले, वही सच्ची ताकत है

दीपा चौधरी बिजनौर (उत्तरप्रदेश)

नहीं थी हीरे मोती की अभिलाषा
बस साथ तुम्हारा चाहती थी
अपने मन के सुनेपन को मैं
खुशियों से भरना चाहती थी
नहीं थी देह की अभिलाषा
बस प्रेम तुम्हारा चाहती थी
जीवन के हर पल को मैं
तुम्हारे साथ बिताना चाहती थी
अब ना है कोई अभिलाषा
ना ही तुम्हारे साथ की आशा
अब खुद के लिए जियूं
बस यही है मेरी अभिलाषा

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