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ये रेशमी जुल्फें

गाँव की गलियों में झांसे की नई कहानी-माथा का बाल 5000 रुपए किलो

सुनील परिहार, सोशल वर्कर महिदपुर रोड, उज्जैन

गाँव की गलियों में एक नई आवाज़ गूंजने लगी है. माथा का बाल … पाँच हज़ार रुपए किलो!पहली बार सुनने पर यह आवाज़ उतनी ही आकर्षक लगती है जितनी किसी मेले में सोने के दाम में चांदीफ बेचने की. लेकिन अगर ज़रा ठहरकर सोचें, तो यह ट्रेंड कहीं हमारे समाज की भोली-बाली मानसिकता का मज़ाक तो नहीं उड़ा रहा?
गाँव-गाँव में नया धंधा
अब गाँवों में महिलाएँ बाल झड़ने पर चिंतित नहीं होतीं बल्कि उन्हें सहेजने लगी हैं.नहाते वक्त गिरते बाल, कंघी में फँसे बाल, सबको वे एक थैली में जमा कर रखती हैं. फिर महीने-दो महीने बाद जब फेरीवाला आता है, तो बालों की वो थैली कमाई का साधन बन जाती है.कभी कुछ रुपये मिलते हैं, तो कभी बर्तन, कपड़े या सस्ता सामान.ऐसे में अब बालों की देखभाल का मतलब ही बदल गया है. बालों को गिरने से बचाओ की जगह अब गिरते बालों को बचाकर रखो हो गया है. यह पूरा दृश्य सुनने में भले हास्यपद लगे, पर इसके भीतर एक गहरी सच्चाई छिपी है. लोगों को समझ नहीं कि ये फेरीवाले कोई जादू नहीं कर रहे, बल्कि चालाकी. वे बालों को किलो के भाव का झांसा देकर बहुत कम कीमत में खरीद लेते हैं और वही बाल आगे जाकर विग, एक्सटेंशन या कॉस्मेटिक उद्योग में ऊँचे दामों पर बिकते हैं.गाँव की महिलाएँ सोचती हैं कि उन्होंने कमाई कर ली,
जबकि असल में वे अपने स्वास्थ्य, सौंदर्य और समझ तीनों का सौदा कर चुकी होती हैं.



असलियत क्या है?
सच्चाई यह है कि मानव बालों का व्यापार एक बड़ा उद्योग है. इन बालों से बनते हैं. विग्स और हेयर एक्सटेंशन,केराटिन आधारित कॉस्मेटिक उत्पाद और यहाँ तक कि तेल रिसाव की सफाई में काम आने वाले मैट्स. इन सबका बाजार अरबों का है और ग्रामीण भारत के भोले उपभोक्ता इसके कच्चे माल बन रहे हैं.एक तरफ शहरों में बालों को फैशन का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गाँवों में वही बाल रोज़गार का झूठा सपना बन गए हैं.

सौंदर्य से उद्योग तक का स़फर
हमारे सिर के बाल केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं, अब करोड़ों रुपये का उद्योग बन चुके हैं. भारत, विशेषकर दक्षिण भारत के तिरुपति, मदुरै और चेन्नई जैसे क्षेत्रों से हर वर्ष लाखों किलो बाल एकत्र किए जाते हैं और टेम्पल हेयर एक्सपोर्ट के नाम से चीन, यूरोप, अमेरिका और ब्राज़ील जैसे देशों में भेजे जाते हैं. इन बालों से बने विग और हेयर एक्सटेंशन की दुनिया भर में भारी मांग है फिल्म, फैशन और मेडिकल सेक्टर तक, भारतीय बाल अपनी प्राकृतिक मजबूती और चमक के लिए प्रसिद्ध हैं. इसी के साथ कई कंपनियाँ इन्हीं बालों से केराटिन निकालकर कॉस्मेटिक और फार्मा उत्पाद बनाती हैं, जिससे उनका मूल्य कई गुना बढ़ जाता है. पर्यावरण क्षेत्र में भी इनका उपयोग बढ़ा है बालों से बने हेयर मैट्स समुद्री तेल रिसाव की सफाई में मदद करते हैं, जबकि सुखाकर पीसे गए बाल नाइट्रोजन-समृद्ध जैविक खाद के रूप में खेती में काम आते हैं.|
बाल बेचने से पहले सोचिए, बाल सँवारिए
बाल झड़ना कोई कमाई का अवसर नहीं, बल्कि शरीर की चेतावनी है.यह पोषण की कमी, तनाव या रासायनिक उत्पादों का असर भी हो सकता है. इसलिए बाल बेचने से बेहतर है उनकी देखभाल करें: आंवला, रीठा, शिकाकाई, मेहंदी, नारियल तेल जैसे प्राकृतिक उपाय अपनाएँ. तनाव कम करें, क्योंकि मन की बेचैनी सिर के बालों तक पहुँच जाती है.केमिकल युक्त शैम्पू और हेयर कलर से बचें. और सबसे ज़रूरी झांसेबाज़ी से दूर रहें.

3 thoughts on “ये रेशमी जुल्फें

  1. कुछ साल पहले अपने ससुराल के गांव की यात्रा के दौरान घर की एक खुंटी पर बालों की थैली टंगी देखी थी। जिग्याशावश पुछने पर पता चला कि बालों को बेचा जाता है।

  2. बहुत खूब लिखा है ,अब ऐसा शहर में भी हो रहा

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