“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर”

तेते पाँव पसारिए जेती लंबी सौर कहावत पर आधारित संतोषपूर्ण जीवन

अर्चना चौधरी, प्रसिद्ध लेखिका, रांची

यह बहुत ही पुरानी कहावत है। कितनी पुरानी यह तो नहीं पता। हो सकता है यही बात कई और ढंग से कही गई हो, पर तथ्य वही है, भाव वही है। हम लोग तो अपनी माँ से यही सुनते-सुनते बड़े हुए। जब भी कभी हम कोई ऐसी डिमांड करते, जो माँ को ठीक नहीं लगती थी, तो वह हमारी बात नहीं सुनती थीं और डिमांड धरी की धरी रह जाती थी। हर बार वे यही दोहा हमें समझाने लगती थीं.

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर।”

हम लोग यही सुनते, गुनते बड़े हुए। कमोबेश हम सब इसी मंत्र के इर्द-गिर्द घूमते रहे। आज कह सकती हूँ—बल्कि बहुत गर्व से कह सकती हूँ—कि इस मंत्र को मैंने कंठस्थ किया और अक्षरशः पालन भी किया। इसी की वजह से कभी दुःख में नहीं पड़ी, और अपने अहम को कभी गिरवी नहीं रखा।

मैं इस सूत्र का मर्म अच्छी तरह समझ पाई हूँ, इसलिए सोचा कि इसे साझा भी करूँ।

बहुत लोग मेरे जैसे ही हैं, पर उनकी संख्या भी कम नहीं, जो छोटी-सी चादर को अपने पैरों की लंबाई से कई गुना बड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी स्वाहा कर देते हैं। ज़्यादातर यह बातें अपने से धनी दोस्तों और रिश्तेदारों से प्रतियोगिता करने, मुकाबला करने में देखने को मिलती हैं।

“हम किसी से कम नहीं यह सोच गुणों, विद्या और क्षमता के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के लिए होनी चाहिए। दिखावटी ज़िंदगी का सर्वाइवल बहुत लंबा नहीं होता। यह पीतल पर सोने का पानी चढ़े मुलम्मे की तरह अस्थायी होता है। नकली अमीरी के चक्कर में, लोगों से होड़ करने के लिए ऐशो-आराम की वस्तुएँ, गाड़ियाँ, बंगले, जेवर-गहने, देश-विदेश की यात्राओं की लालच में लोग अपनी और अपने पूरे परिवार की ज़िंदगी और भविष्य बर्बाद कर देते हैं।

बैंक से, रिश्तेदारों से इतना कर्ज़ ले लेते हैं, जिसे कभी चुका नहीं पाते। कई बार लोगों को कर्ज़ में डूबकर अपनी और अपने परिवार की ज़िंदगी दाँव पर लगाते भी देखा है।

ऐसे स्वभाव के लोग केवल स्वयं ही बर्बाद नहीं होते, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ी को भी उसी सोच की ट्रेनिंग देकर कर्ज़ में आकंठ डूबा हुआ परिवार विरासत में सौंप जाते हैं।

इसलिए हमेशा याद रखें-“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर।”

हाँ, यह भी उतना ही ज़रूरी है कि अपने पुरुषार्थ से यह प्रयास लगातार करते रहें कि अपनी सौर कितनी लंबी की जा सकती है। सौर लंबी कीजिए, पाँव उसी के हिसाब से बढ़ाइए और खुश रहिए।

संतुष्ट रहिए, सुखी रहिए।

4 thoughts on ““तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर”

  1. मेरे प्रिय मित्र,
    तुम्हारी इस शानदार उपलब्धि पर दिल से बहुत-बहुत बधाई!
    यूँ ही आगे बढ़ते रहो,
    सफलता हर कदम पर तुम्हारे साथ हो।
    गर्व है तुम पर! 🌟✨

    1. बेहतरीन रचना, प्रेरित करती लेखनी

  2. तुम्हारी सफलता पर दिल से बहुत-बहुत बधाई!
    यूँ ही नई ऊँचाइयाँ छूते रहो। 🌟✨

    1. मेरी प्रिय सखी ! बहुत ही सुंदर प्रेरित करनेवाली लेखनी है।

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