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तेते पाँव पसारिए जेती लंबी सौर कहावत पर आधारित संतोषपूर्ण जीवन

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर”

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर” केवल कहावत नहीं, बल्कि संतोष, आर्थिक समझदारी और दिखावे से दूर रहकर सुखी जीवन जीने का मार्गदर्शन है।

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रिश्तों को तह करती औरत

औरत हर दिन अपने रिश्तों को ऐसे तह करती है जैसे बिस्तर पर फैले कपड़े। शिकायतों की सलवटें मोड़कर छुपा देती है, बेरुख़ी को मुस्कान के पल्लू में ढँक लेती है। आँसुओं में धोकर, सहनशीलता की धूप में सुखाए इन रिश्तों को वह अपनी आत्मा के धागों से सीती रहती है। कुछ रिश्ते पुराने कुरतों जैसे ढीले हो चुके हैं, कुछ दुपट्टों जैसे बार-बार फिसलते हैं—फिर भी वह संभालती जाती है। लेकिन रात के सन्नाटे में उसके मन में एक सवाल उभरता है—क्या कभी कोई उसे भी इसी तरह तह करके सँभाले रखता होगा, या वह खुद ही वह अलमारी है, जिसमें सब रखा जाता है, पर कोई कभी खोलकर नहीं देखता।

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