रामनवमी शोभायात्रा विवाद: पुणे में रिक्शा चालक पर जानलेवा हमला

रामनवमी शोभायात्रा के विवाद में युवक पर जानलेवा हमला

पुणे में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान हुए विवाद के बाद एक रिक्शा चालक पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया. पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है.

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अब बात नहीं करोगे…

उस दिन उसने कहा-“अब बात नहीं करोगे।”
शब्द ठंडे थे, पर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। मैं मुस्कुरा दी और कह दिया-“मैं भी बात नहीं करूँगी।”
वास्तव में, हमने पहले ही बातचीत खो दी थी। मैं हर रोज़ उसके पास बैठकर कुछ पल चाहती थी. बस सुनना, समझना, साथ में रहना। लेकिन वह हमेशा जवाब देता रहा, पर कभी वास्तव में मौजूद नहीं था। महँगे तोहफ़े, बड़े रेस्टोरेंट, दिखावटी सुख, कुछ भी मेरे भीतर के खालीपन को भर नहीं सका।

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धारा और संकल्प

कंकड़ और पत्थरों ने मिलकर नदी की दिशा मोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने उसके प्रवाह को रोकने के लिए बाँध बनाए, टीले खड़े किए और पहाड़ बनने का सपना देखा। लेकिन नदी – जो स्वयं प्रवाह की देवी है – न रुकी, न झुकी। वह ठोकरें खाती रही, पर हर बाधा के पार एक नया मार्ग खोजती रही। अपनी गति को कभी न छोड़ते हुए, उसने प्यासों को जल, खेतों को हरियाली और जीवन को उम्मीद दी। अंततः, जब सारे पत्थर थक गए और टीले मिट्टी बन गए, नदी अपनी मंज़िल — समुद्र — तक पहुँच गई। उसने सिद्ध किया कि उसे रोका जा सकता है थोड़ी देर के लिए, पर हमेशा के लिए नहीं। क्योंकि उसका अस्तित्व ही बहते रहने में है।

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स्कूटी वाली..

आज औरतें रॉकेट से लेकर एयरप्लेन तक उड़ा रही हैं, और फिर भी कुछ लोग स्कूटी चलाने पर सवाल उठाते हैं। सच तो यह है कि समस्या लड़कियों की ड्राइविंग नहीं, बल्कि कुछ लोगों की नीयत और सोच में है। हम औरतें हवा में अपने पंख फैलाकर आगे बढ़ती रहेंगी .किसी को मिर्ची लगे तो लगे।

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“मन का कोना” गोष्ठी में कविता पाठ करते साहित्यकार, कांदिवली मुंबई

कविता की महफिल में सजी ‘मन का कोना’ गोष्ठी

मुंबई के कांदिवली स्थित ठाकुर कॉम्प्लेक्स में आयोजित “मन का कोना” साहित्यिक गोष्ठी में रचनाकारों ने काव्यपाठ से समां बांध दिया। इस मासिक आयोजन में बढ़ती भागीदारी इसके विस्तार और लोकप्रियता का संकेत दे रही है।

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ट्रेन के सफर में जागी पुरानी यादों के बीच

खुशबू वाला शहर

ट्रेन के एक छोटे से ठहराव ने अमृता के दिल में दबी यादों को फिर जगा दिया। सूखा गुलाब, सुनहरा पेन और बीते लम्हों की खुशबू के बीच यह कहानी प्रेम, दूरी और अधूरी मोहब्बत का दर्द समेटे हुए है।

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त्योहार पर घर

घर जाने का नाम आते ही उसके भीतर एक अजीब-सा डर जाग उठता है। डर किसी अनजान रास्ते का नहीं, बल्कि एक बहुत परिचित सवाल का है—
“क्या करते हो आजकल?”यही सवाल उसकी हिम्मत तोड़ देता है। यही वजह है कि वह एक और त्योहार भी अपने छोटे से कमरे में बिताने को मजबूर हो जाता है।उसके चारों ओर बिखरी रहती हैं कुछ पुरानी किताबें, कुछ बर्तन, मेज़ पर रखा टेबल लैंप और कोनों में धुंधले पड़ते सपनों की परछाइयाँ। इन्हीं सबके बीच वह सोचता है कि क्या उसे एक और साल की मोहलत खुद को देनी चाहिए या फिर चुपचाप उन सपनों को यहीं छोड़ देना चाहिए।

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साड़ी में खड़ी एक बहू, पीछे धुंधली पारिवारिक पृष्ठभूमि, चेहरे पर मिश्रित भावनाएँ

बेटी से बहू कब बन गई…?

यह लेख दर्शाता है कि किस तरह एक लड़की शादी के बाद बेटी से बहू बन जाती है, और कैसे समय आने पर उससे बेटी जैसा व्यवहार अपेक्षित किया जाता है। यह लेख रिश्तों में सच्चे अपनापन और समान सम्मान की आवश्यकता पर भावनात्मक प्रकाश डालता है।

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एक व्यक्ति शांत वातावरण में डायरी लिखते हुए, मन की गहराई को व्यक्त करता हुआ

मन की कही

“मन की कही” एक भावनात्मक और आत्मचिंतन से भरी हिंदी रचना है, जो मन की उन अनकही बातों को व्यक्त करती है जिन्हें हर किसी से साझा नहीं किया जा सकता। यह लेख विश्वास, आत्मीयता और मौन के महत्व को उजागर करता है, और बताता है कि क्यों हर दिल हमारे रहस्यों का भार नहीं उठा सकता। अंत में यह संदेश देता है कि एक पुस्तक ही सबसे सच्ची और निस्संदेह साथी बन सकती है।

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