खुशबू वाला शहर

ट्रेन के सफर में जागी पुरानी यादों के बीच

विजया डालमिया, हैदराबाद

जब- जब मैं इस शहर से गुजरती हूं दिल मानो वहीं थम जाता है। हालांकि अब वहां कुछ नहीं। हमारे लिए शहर मायने नहीं रखता। मायने रखते हैं वहां रहने वाले इंसान। हर इंसान अपने आप में एक यादों का शहर लेकर चलता है। जैसे ही ट्रेन थमी, मेरी भी यादों की कड़ी इस शहर के इंसान पर आकर थम गई। शाम के 6:00 बज रहे थे, किंतु ठंड की वजह से यूं लग रहा था मानो कितना अंधेरा हो गया हो… ठीक मेरे मन की तरह। एक बार अगर यादों के कोहरे ने मुझे घेरना शुरू कर दिया तो फिर बस मुझे कुछ दिखाई नहीं देता… सिवाय एक धुंधली आकृति के। तभी जैसे मुझे किसी ने कोहरे की चादर हटाकर आवाज दी… अमृता जी ….अमृता जी। मैंने देखा एक दुबली-पतली काया ट्रेन की खिड़की से झांक कर इशारों में मुझसे कुछ कह रही थी। मैंने खिड़की खोली तो उसने खिड़की से ही मुझे एक पैकेट थमाया यह कहते हुए कि….” यह आपका सामान”। मैं कुछ पूछती उससे पहले ही ट्रेन चल पड़ी। मैंने पैकेट खोला। एहसासों की आकृतियां शक्ल के रूप में चहलकदमी करने लगी।
… अमृता सुनो ना, तुम्हारे बालों में यह गुलाब बहुत अच्छा लगेगा…. कहकर जब उसने गुलाब लगाया तो मैं इंकार न कर सकी। यह वही गुलाब था।
…. मैं तुम्हारे लिए कुछ लाई हूं….
.. क्या..?
… यह रुमाल…
… अच्छा ! इसमें स्पेशल क्या है…? जैसे ही उसने शरारती अंदाज में मुझसे पूछा मैंने कहा…. देखो मैंने तुम्हारा नाम इसमें कितने सुंदर अंदाज में एंब्रॉयडरी से सजाया है….।
उसने मेरे हाथों को चूमकर कहा… तुम मेरे लिए रुमाल लेकर आई, यही बहुत स्पेशल था। इस पर तुम्हारे हाथों की एंब्रायडरी…. वाह भई वाह…
मैंने हौले से उस नाम पर उंगली फिराई तो वही एहसासों का स्पर्श मुझे मुझे सहलाते चला गया।
…अमृता क्या बात है? क्यों परेशान हो?
… अरे मेरा वह ब्रेसलेट नहीं दिख रहा जो मैं हमेशा पहनती हूं। पता नहीं कहां गुम हो गया।
… छोड़ो ,कहीं खो गया होगा। एक ब्रेसलेट के लिए इतनी परेशान?
… नहीं यार, वह मेरे लिए बहुत लकी है। आज मेरा लकी ब्रेसलेट मेरे पास था पर मैं लकी नहीं थी शायद।मैंने ब्रेसलेट एक साइड में रख दिया।
… सुनो अपूर्व यह गोल्डन पेन अपने पास रखो। तुम इंटरव्यू के लिए जा रहे हो ना। अच्छा दिखेगा।
… थैंक्स अमृता। यार तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो। अमृता जब कभी तुम मुझसे दूर जाओगी तो मैं इसी पेन से तुम्हें खत लिखा करूंगा…।
… अच्छा… कह कर उसने जब उसकी आंखों में झांका तो वह कहने लगा…. तुम्हारे सुनहरे वाले पेन से मेरे दिल के जज्बात सुनहरे हो गए… कहकर उसने पेन अपने शर्ट में लगा लिया।
सुनहरा पेन आज भी जगमगा रहा था, पर जज्बात सारे धूमिल हो चुके थे।
जुदा होना कितना कठिन है, यह तब समझ में आता है जब अकेले चलते-चलते सर्द राहों में हमें प्यार की कोई शाॅल नहीं मिलती।आंखों की सूजन समझाती है कि रोने से ज्यादा अच्छी वो सूजी आंखें थी जो रात भर जागकर बात करने के बाद आती थी।
ओह अपूर्व… यह सामान तुम्हारे लिए बहुत कीमती था, पर मेरे लिए तो तुम्हारा वह साथ …तुम्हारी प्यारी बातें ही मायने रखती थी।लौटा सको तो लौटा दो वो लंबी-लंबी बातों वाली छोटी-छोटी रातें।वह एहसास जो हाथों को छूकर राहों में साथ-साथ थिरकते थे। वह पैगाम जो आंखों ने आंखों को दिए और खामोशी ने समझ कर मीठी मुस्कान के साथ स्वीकृति दी। क्या लौटा सकोगे मेरा वो वक्त जो हमने साथ बिताया? वो आंसू जो हमने साथ बहाये और वह लम्हे जिनमें हम साथ -साथ मुस्कुराए?

खुश्क हुई आंखों से एक आंसू गिरा ।अमृता ने यादों की पोटली बंद कर दी। सूखे गुलाब से खुशबू आज भी आ रही थी।

बीती यादें जब कभी
छूकर गुजर जाती है
तन -मन में एक हलचल सी मचा
जाती है
सो गए जो ख्वाब
फिर से जाग जाते हैं
फिर रातों में नींद
कहां आती है…

लेखिका के बारे में-

विजया डालमिया

विजया डालमिया समकालीन हिंदी साहित्य जगत की ऐसी संवेदनशील और प्रभावशाली लेखिका हैं, जिनकी रचनाएँ पाठकों के मन की गहराइयों तक पहुँचने की क्षमता रखती हैं। उनके लेखन में भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति, जीवन के सूक्ष्म अनुभवों की सजीव प्रस्तुति और मानवीय रिश्तों की गहन समझ स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. वे प्रेम, पीड़ा, मौन, स्मृतियाँ, आत्मसंवाद और संवेदनाओं जैसे विषयों को अत्यंत मार्मिकता से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी कविताओं और विचारों में ऐसी आत्मीयता होती है कि पाठक स्वयं को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता है। विजया डालमिया की रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे व्यक्तिगत अनुभवों को सार्वभौमिक भावों में बदल देती हैं। यही कारण है कि उनकी पंक्तियाँ हर पाठक को अपनी कहानी सी प्रतीत होती हैं। वे शब्दों के माध्यम से न केवल भाव जगाती हैं, बल्कि पाठकों को आत्मचिंतन के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनकी लेखनी में कोमलता भी है, गहराई भी; मौन भी है, संवाद भी; दर्द भी है और उसी दर्द में छिपी उपचार की शक्ति भी। यही गुण उन्हें एक सशक्त, विचारशील और हृदयस्पर्शी लेखिका के रूप में स्थापित करते हैं.

3 thoughts on “खुशबू वाला शहर

  1. बीते वक्त लौटते नहीं पर उन लम्हों की यादें रह जाती है बह प्यारी कहानी 👌

    1. कढ़ाई वाले रुमाल, पेन… ख़ूबसूरत उपहार.. जिसे आपने अपनी रचना में दर्शाया… छोटी छोटी सी बातों में आप गहराई ढूंढती हैं आपकी ये ख़ासियत मुझे बहुत अच्छी लगती है 👌💐

      1. आदरणीय मधुजी
        आपने अन्य रचनाकारों की रचनाओं पर अपनी टिप्पणी देकर जो प्रेम और स्नेह प्रदर्शित किया है. वह सचमुच आपको महान बनाता है.

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