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फ्रेंडशिप डे पर महिदपुर रोड के मोहल्ला परिवार के सदस्य एक साथ उत्सव मनाते हुए.

दोस्ती की वह छांव, जहां पूरा मोहल्ला एक परिवार बन गया

कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते दिल से बनते हैं. महिदपुर रोड का यह मोहल्ला परिवार ऐसी ही दोस्ती की मिसाल है, जहां बिना किसी पद, संगठन या स्वार्थ के लोग वर्षों से एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े हैं. गौसेवा, पारिवारिक समारोह और निस्वार्थ अपनापन इस परिवार की पहचान बन चुके हैं. फ्रेंडशिप डे पर पढ़िए दोस्ती की एक ऐसी सच्ची कहानी, जो हर दिल को छू जाएगी.

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड़ लगाते लोग, हरित प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।

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सूर्योदय के समय खड़ा एक व्यक्ति, जिसके पीछे राम का प्रतीकात्मक प्रकाश आभामंडल, आंतरिक जागृति और आध्यात्मिक ऊर्जा को दर्शाता हुआ दृश्य

“जाग जाओ तो राम हो”

यह कविता व्यक्ति के भीतर छिपे रामत्व को जागृत करने की प्रेरणा देती है। कवि ने राम, रावण, कुंभकर्ण, जटायु और गिलहरी जैसे प्रतीकों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है कि हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। यदि हम अपने विवेक और संस्कारों को जगाएं, तो हम भी अपने जीवन में राम के आदर्शों को प्राप्त कर सकते हैं।

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सिंदूर से रक्त तक: बदलते रिश्तों पर एक मार्मिक कविता

चरित्र का हनन

प्रेम, विश्वास और रिश्तों की डोर जब छल और स्वार्थ के बोझ तले टूट जाती है, तब केवल दो दिल नहीं बिखरते, बल्कि कई परिवारों की खुशियाँ भी उजड़ जाती हैं। ‘चरित्र का हनन’ कविता आधुनिक समाज में बदलती मानसिकता, विश्वासघात और संवेदनाओं के क्षरण पर एक मार्मिक प्रहार है।

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जयपुर में आयोजित ब्रज रसिया होली कार्यक्रम में राधा-कृष्ण प्रस्तुति और रंगों के बीच नृत्य करते कलाकार

जयपुर में गूंजा “ब्रज रसिया”-होली के रंग.. कृष्णा के संग”

जयपुर में राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी एवं सम्पर्क संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “ब्रज रसिया – होली के रंग… कृष्णा के संग” कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। चार घंटे तक चले इस आयोजन में राधा-कृष्ण प्रस्तुति, फाग गीत, नृत्य और काव्य प्रतियोगिताओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को ब्रज भाषा और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना रहा।

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अजीर्जुरहमान भाईजान दोस्ती की कहानी

अजीर्जुरहमान : गिफ्ट ऑफ गॉड

अजीर्जुरहमान उर्फ भाईजान के साथ 25 साल पुरानी दोस्ती की यह कहानी सिर्फ यादों का सिलसिला नहीं, बल्कि सच्चे रिश्ते, बेबाक स्वभाव और जीवन के संघर्षों की झलक है। पत्रकारिता, गांव की राजनीति और जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच भी यह दोस्ती हमेशा मजबूत बनी रही। ❤️

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आत्मसंतुष्टि

बरसों बाद जब रेणू ने कलम उठाई, उसके दिल और दिमाग में अजीब सी मस्ती फैल गई। शब्दों का सागर उसके भीतर गोते लगा रहा था, और दिमाग उस सागर से मोती चुनकर उन्हें पंक्तियों में सजाने में व्यस्त था। भावनाओं की लहरें उठ रही थीं, और उसकी नाव—जो कविता का रूप धारण कर चुकी थी—उन लहरों को पार कर रही थी। हर शब्द, हर भाव उसे आत्मसंतुष्टि के द्वार तक ले गया। रेणू ने महसूस किया कि लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा की शांति का साधन भी है। उसकी नाविक बनकर, वह अपनी रचनात्मकता की शक्ति को महसूस करते हुए आत्मसंतुष्टि के द्वार पर पहुँच गई।

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स्वाभिमान

हर रोज मैट्रो स्टेशन पर भीख मांगती वह अंधी भिखारन मेरी नजरों के सामने होती।
एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने पर मैंने देखा कि उसकी देखभाल एक जवान लड़की कर रही थी। कई सालों के दर्द और असहायता के बावजूद, उस बच्ची ने उसकी सेवा को अपना स्वाभिमान बना लिया। भीख मांगना नहीं, बल्कि सहयोग और मानवता की यही असली पहचान है।

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नन्हीं डलिया में बताशे

यह कविता बीते दौर की उस मासूमियत और सामाजिक गर्मजोशी को याद करती है, जो अब आधुनिक जीवन की भागदौड़ में खो गई है। कभी गलियों में बच्चों की डुगडुगी, उपवनों में शर्माती कलियाँ, और दोस्तों का एक पुकार पर दौड़ आना — ये सब अब दुर्लभ हो गए हैं। कवि ने भावपूर्ण शब्दों में यह अहसास जताया है कि समय के साथ रिश्तों, संवेदनाओं और सादगी की वो चमक अब धुंधला चुकी है।

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श्मशान से लौटती साँसें…

श्मशान की राख से लौटकर जब ज़िंदगी की जिम्मेदारियाँ बाँहों में भर ली जाती हैं—तब यह कविता मृत्यु से आँख मिलाकर जीवन को चुनने का साहस बन जाती है।

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