
चंद्रवती दीक्षित, प्रसिद्ध लेखिका, करनाल (हरियाणा)
राजू बड़ा ही खुश था आज।
जन्मदिन का उसने पहना ताज॥
सबका आशीर्वाद मिला।
उसके मन का फूल खिला॥
उसने सारी कक्षा सजाई।
जो सबके मन को भाई॥
अध्यापिका ने गले लगाया।
सहपाठियों ने गाना गाया॥
मनपसंद के बने व्यंजन।
सब पर दया करे दुःखभंजन॥
गऊ माता को भोग लगाया।
अपने बड़ों को शीश नवाया॥
नीम का उसने पेड़ लगाया।
आँगन की शोभा को बढ़ाया॥
देसी घी की ज्योत जगाई।
घर की बनी खाई मिठाई॥
पक्षियों को दाना डाला।
प्रण लिया बेकार न जाए निवाला॥
सफाई में भी हाथ बटाया।
मित्रों के संग भोजन खाया॥
दादीजी ने भजन सुनाया।
घरवालों ने नाच दिखाया॥
आलू का पराठा टोमी को खिलाया।
पशु-प्रेम का पाठ पढ़ाया॥
पानी की बर्बादी रोकी।
शाबाशी की ताल ठोकी॥
मोबाइल से कन्नी काटी।
कहानी सुनने की छूट छांटी॥
अच्छा पढ़ने का किया वादा।
संस्कारी जीवन सरल, सादा॥
उसने सराहना खूब पाई।
जन्मदिवस की बजी शहनाई॥
जन्मदिन की प्यारी सौगात।
खुशियों की आ गई बरसात॥
