
झरना माथुर, प्रसिद्ध लेखिका, देहरादून
उत्सव मनाओ, सबको बुलाओ।
उल्लास आया, आनंद छाया।।
शुभ दिन दिखाया, वादा निभाया।
पूजन कराओ, थाली सजाओ।।
बन्नी हमारी, सबकी दुलारी।
पी संग में वो, पी रंग में वो।।
नाज़ों पली है, देखो चली है।
अब है पराई, जीवन कमाई।।
चंदा लगे है, क़िस्मत जगे है।
मुन्नी सजाओ, चुनरी उड़ाओ।।
चूड़ी हरी है, हाथों भरी है।
ढोलक बजे है, आँगन सजे है।।
दोनों घरों की, दोनों दरों की।
तुम शान हो ना, मेरी सलोना।।
ममता लुटाना, इज़्ज़त कमाना।
लाड़ो हमारी, लाखों हज़ारी।।
