नारी, तुम नारायणी…
नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।

नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।
“सांवला रंग” एक प्रेरक लघुकथा है जो समाज में व्याप्त रंगभेद की मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। कहानी में एक माँ अपने जीवन में झेले गए तिरस्कार को याद करते हुए संकल्प लेती है कि उसकी बेटी की पहचान उसके रंग से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और उपलब्धियों से होगी। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम तब सामने आता है जब उसकी बेटी आई.पी.एस. अधिकारी बनकर पूरे शहर का गौरव बन जाती है।
एक शहीद सैनिक की बेटी की दृष्टि से लिखी गई यह हृदयस्पर्शी कविता पिता के बलिदान, माँ के दुःख और एक बेटी के अधूरे स्नेह की कहानी कहती है। “मैं पापा की नन्ही परी” पाठकों की संवेदनाओं को गहराई से छू लेने वाली रचना है।
खुशबू गोयल माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न।नहीं पकड़नी ये करछी मुझको,ज़रा कलम तो पकड़ाओ न। भैया भी तो पढ़ने जाता है,मुझको भी तो पढ़ाओ न।माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न। मेरे भी तो सपने हैं,करने उनको अपने हैं।मत सुलगाओ चूल्हे की अग्नि में मुझको,विद्यालय…