लोकगीत
अपनी-अपनी रुपमती : ‘मांडू’ सिटी ऑफ लव
दुनिया मांडू को सिटी ऑफ जॉय कहती है, लेकिन जो एक बार उसे ठहरकर महसूस कर ले, उसके लिए मांडू हमेशा सिटी ऑफ लव ही रहता है। मध्यप्रदेश के तमाम पर्यटन स्थलों में अगर किसी जगह की हवा में सबसे ज़्यादा भावनाएँ घुली हैं, तो वह मांडू है। यहाँ महलों की भव्यता से ज़्यादा, खंडहरों की खामोशी बोलती है।
पुराना बरगद का पेड़
रिक्त लटका झूला सावन में,
पुराने बरगद के पेड़ में,
ताक रहा है राह को —
ना जाने कब आएंगी बेटियाँ।
पूछ रहा है वो पुराना बरगद का पेड़ —
अब सावन में क्यों नहीं आतीं हैं बेटियाँ?
बूंदों के नूपुर
अम्बर चमके दामिनी, रिमझिम पड़े फुहार, सोंधी माटी की महक से भीगता देहात, सावन की झूले झूलती सखियाँ, बादलों संग गूंजता बूंदों का संगीत — यह कविता मानसून के सौंदर्य, ग्रामीण जीवन के उल्लास और प्रकृति की रूमानी छवि को भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है।
