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बेंगलुरु की सड़कों पर “हैप्पी एयर परेड”

बेंगलुरु। 25 जनवरी को बेंगलुरु की सड़कों पर एक अनोखा और दिल को छू लेने वाला दृश्य देखने को मिलेगा। हैप्पी एयर (Happpy AiR) और बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से पूरे शहर में “हैप्पी एयर परेड” निकाली जा रही है। यह परेड किसी एक रूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर के व्यस्ततम सार्वजनिक…

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रीता मिश्रा तिवारी परिचय

रीता मिश्रा तिवारी : शब्दों की साधिका

रीता मिश्रा तिवारी हिंदी साहित्य की सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और लघुकथा के माध्यम से समाज को नई संवेदना और चेतना दी है।

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मिट्टी के घर और जीवन की नश्वरता पर आधारित हिंदी कविता

मिट्टी का ये घर है अपना

मिट्टी से बने इस शरीर और संसार की नश्वरता को समझाती यह कविता याद दिलाती है कि धन, मान-सम्मान और रिश्ते सब यहीं रह जाते हैं. जीवन में जब तक साँसें हैं, प्रेम बाँटना ही सबसे बड़ी सार्थकता है।

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बंगलौर में मिथिला महोत्सव:

“बंगलौर की धरती पर मिथिला समाज ने पहली बार संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराया। पान, माछ, मखान के स्वाद और धरती से जुड़ने की परंपरा ने यह साबित कर दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही पहचान बचती है।”

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“मन का कोना” गोष्ठी में कविता पाठ करते साहित्यकार, कांदिवली मुंबई

कविता की महफिल में सजी ‘मन का कोना’ गोष्ठी

मुंबई के कांदिवली स्थित ठाकुर कॉम्प्लेक्स में आयोजित “मन का कोना” साहित्यिक गोष्ठी में रचनाकारों ने काव्यपाठ से समां बांध दिया। इस मासिक आयोजन में बढ़ती भागीदारी इसके विस्तार और लोकप्रियता का संकेत दे रही है।

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स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के साथ देश के प्रति नागरिक जिम्मेदारी का संदेश

हमने देश को क्या दिया ?

देश ने हमें आजादी, स्वाभिमान और विकास का अवसर दिया. लेकिन क्या हमने अपने देश को उतना ही लौटाया? स्वतंत्रता दिवस पर नागरिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और सच्ची देशभक्ति पर आत्ममंथन करता यह लेख.

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जब से तुमसे नयन मिले

महक

जब से हमारी नज़रें मिली हैं, दिल की दुनिया बदल सी गई है. इच्छाओं को जैसे नए पंख मिल गए हैं और हर ख्वाहिश अब तुम्हारी ओर ही उड़ती है. दिल की बातें दिल तक पहुंचने को तरस रही हैं, लेकिन सावन की बरसात हमारे मिलने में दूरी बनकर खड़ी है. हर बूंद में एक अजीब सी आग है, जो तुम्हारी याद और लगन को और गहरा कर देती है. मन में बस एक ही चाह है तुमसे मिलना, तुम्हारे करीब आना, और इस प्रेम को हर पल जीना.

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मोहब्बत में बिछड़न और तन्हाई का दर्द व्यक्त करती हिंदी कविता 'मोहब्बतें'

मोहब्बतें

“मोहब्बतें” प्रेम की उन अनकही भावनाओं की कविता है, जहाँ इबादत, आदत, तन्हाई और बिछड़न एक-दूसरे में घुल जाते हैं। यह रचना अधूरे रिश्तों की टीस, यादों की क़यामत और दिल में दबी शिकायतों को बेहद संवेदनशील और मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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तीज का त्यौहार

सावन की रिमझिम फुहारों और काली घटाओं के बीच जब मोर नाचने लगते हैं, तो प्रकृति का हर रंग और स्वर एक अलग ही उमंग लेकर आता है। ऐसे ही मौसम में तीज का पर्व गाँव-गिरांव से लेकर शहरों तक उल्लास फैलाता है। बिटिया की ससुराल कोथली लेकर जाते पिता, माँ-बाबा का स्नेह, पीहर आई बेटियाँ, बचपन की सखियों से मिलन — सब मिलकर सावन को खास बना देते हैं। झूले की पींगे, हँसी की चहक, कजरी की हूक और विरह की टीस — हर भाव इस मौसम में शामिल होता है। धानी चूनर ओढ़े धरती, आमों से लदी अमराई, घेवर की मिठास और मेलों की रौनक मिलकर सावन और तीज के इस त्योहार को यादगार बना देती है।

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प्रकृति के बीच अकेली स्त्री, घास पर बैठी आसमान की ओर देखती हुई, आत्मचिंतन का शांत दृश्य

फिर कभी न लौटने के लिए…

“फिर कभी न लौटने के लिए…” एक गहन भावनात्मक और दार्शनिक कविता है, जिसमें कवयित्री तन्हाई, प्रकृति और आत्म-अन्वेषण के माध्यम से जीवन के गूढ़ प्रश्नों को समझने की कोशिश करती है। यह कविता आत्मा की शांति और अस्तित्व की खोज का संवेदनशील चित्रण है।

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