बंगलौर की धरती पर मिथिला समाज ने एक ऐतिहासिक पल रचा। मैथिलों ने एकत्रित होकर अपनी संस्कृति, सभ्यता और एकता का परिचय दिया। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा, “हम मिथिलावासी कभी किसी से कम नहीं, कमी बस संगठित होने की है।”
कार्यक्रम में मिथिला की सांस्कृतिक विरासत — पान, माछ और मखान — की भव्यता का प्रदर्शन किया गया। वक्ताओं ने संदेश दिया कि चाहे हम दुनिया के किसी कोने में रहें, अपनी पहचान और अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही सच्ची प्रगति है।
कार्तिक जी के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य आयोजन में पहली बार बंगलौर की धरती पर मैथिल समाज ने संगठित रूप में एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया। पलथी मारकर जमीन से जुड़ने की परंपरा निभाई गई और मिथिला के सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित किया गया। आयोजन में भविष्य में और भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम करने का संकल्प लिया गया।

बेंगलौर से राही राज की रिपोर्ट
