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हां! मैं मधुशाला जाता हूं…

हाँ, मैं मधुशाला जाता हूँ। अपनी सुध-बुध मिटाने, मृगतृष्णा जैसे सपनों को थोड़ी देर छू लेने, थोड़ा बुदबुदा कर मन की गाँठें ढीली करने और अपने ही दिल को समझाने के लिए। कड़वी बातें जब अंदर लंबी चुभन बनकर रह जाती हैं और हँसी की गुंजन भी फीकी पड़ जाती है.तब बस थोड़ी नई ऊर्जा जुटाने को मैं वहाँ जाता हूँ। मैं नादान भी नहीं हूँ और न पागल, न ही कोई भटका हुआ आदमी। दूसरों की सभी बातें सुनकर भी अपने असली ज़ख्म तो दिल में ही रखता हूँ और इन्हीं घावों की आवाज़ सुनने के लिए भी मैं मधुशाला जाता हूँ।

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सच्चा साथी, सच्चा प्रेम

यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम, स्नेह और जीवनसाथी के साथ जुड़े भावनात्मक अनुभव को उजागर करती है। इसमें प्यार की गहराई, भरोसा और साथी के साथ जीवन भर निभाए गए रिश्ते की मिठास को सरल और असरदार भाषा में व्यक्त किया गया है।

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में  जाम

वाहनों की 8 से 10 किलोमीटर लंबी कतारें  लोणावाला: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट में शनिवार तड़के से ही भारी यातायात जाम लगा हुआ था. मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की 8 से 10 किलोमीटर लंबी कतारें लगी थीं. यह जाम लगभग नियंत्रित होने ही वाला था कि शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे एक चलती रेनॉल्ट…

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रथ के पास खड़े सूर्यपुत्र कर्ण का गंभीर और चिंतनशील स्वरूप, जो अपनी नियति और पहचान के संघर्ष को दर्शाता है।

कर्ण की व्यथा

‘कर्ण की व्यथा’ महाभारत के महान योद्धा सूर्यपुत्र कर्ण के मन में छिपे उस दर्द को शब्द देती है, जहाँ जन्म, पहचान, रिश्ते और नियति के बीच उनका अकेलापन मुखर होकर सामने आता है। यह कविता पाठकों को कर्ण के अंतर्मन से जोड़ती है।

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सृष्टि रचयिता : नारी      

नारी को अबला कहना उसके अस्तित्व के साथ अन्याय है। वह सृष्टि की रचयिता, संवेदना की मूरत और असीम शक्ति की प्रतीक है। धूप, सर्दी, गर्मी और जीवन के हर थपेड़े सहकर भी वह संसार में सौंदर्य और संतुलन भरती है। कभी दुर्गा, कभी चंडी, वह मानव जाति का अभिमान है। फिर भी इतिहास में सीता, द्रौपदी और गांधारी जैसी अनेक नारियां अन्याय सहने को विवश क्यों हुईं? क्या परिवार का संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी सिर्फ उसी की है? सवाल यही है कि हर नारी रानी लक्ष्मीबाई या रानी दुर्गावती की तरह साहसी और प्रतिकार करने वाली क्यों नहीं बन पाती।

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घर की राशन दुकान पर बातचीत करती लड़की और बुजुर्ग महिला का दृश्य

खुराफात

खुराफात एक रोचक संस्मरणात्मक कहानी है जिसमें एक लड़की की अजीब चालाकी और उससे जुड़ी घटना का दिलचस्प वर्णन है। यह कहानी रिश्तों, मासूमियत और जीवन के अनोखे अनुभवों को हल्के हास्य के साथ प्रस्तुत करती है।

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Pune Grand Tour 2026 Stage 2 race on Sinhagad Road with cyclists competing for yellow jersey

सिंहगढ़ रोड की चढ़ाइयों ने बदली रेस की तस्वीर

सिंहगढ़ रोड की चढ़ाइयों ने Pune Grand Tour 2026 के स्टेज-2 को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। 105.3 किमी की रेस में ल्यूक मुडग्वे ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की।

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मुझसे मुझ तक…

प्रेम मेरे लिए कभी प्रश्न नहीं रहा।
मैंने देखा है तृणों को ओस की बूँदों को थामते हुए,
नन्हें जीवों को अपनी माँ की खोज में भटकते हुए,
धरती को तपिश में बादलों के लिए तड़पते हुए,
और पतझड़ को बसंत की याद में बिलखते हुए।
मेरे लिए तो यही है प्रेम की सबसे संजीदा कहानी जहाँ पीड़ा भी करुणा में ढल जाती है,
और आँसू भी कविता बनकर बह निकलते हैं।

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•••साहित्य अकादमी की चारों पीठ पर निदेशक नियुक्त

साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अंतर्गत चार सृजन पीठ कार्यरत रहती हैं। इन चारों पीठ पर निदेशकों की नियुक्ति करते हुए प्रेमचंद सृजन पीठ पर उज्जैन के ही लेखक-व्यंगयकार मुकेश जोशी को निदेशक मनोनीत किया है। इस पद पर पिछले चार साल से अनीता पंवार पदस्थ रहीं लेकिन इन चार सालों में लगा ही नहीं कि इस पीठ की साहित्यिक गतिविधियों से कोई ताल्लुक भी है।

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