आचार्य श्री राजरक्षितसूरिजी ने प्रवचन में समाज, राजनीति और पर्यावरण को लेकर जताई गहरी चिंता

सुरेश परिहार, पुणे
दुनिया में पानी, अनाज और पेट्रोल से भी बड़ा अकाल सच्चे इंसान का है. यह विचार आचार्य श्री राजरक्षितसूरिजी ने श्री पद्मप्रभ स्वामी जिनालय, पद्ममणि जैन संघ, पाबल में आयोजित प्रवचन सभा में व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि आज का सबसे बड़ा संकट संसाधनों का नहीं, बल्कि सच्चे और सज्जन इंसानों की कमी का है. सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक या राजनीतिक, हर क्षेत्र में ईमानदार और संवेदनशील लोगों की नितांत आवश्यकता है.
आचार्य श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि डॉक्टर के भीतर इंसानियत नहीं होगी, तो वह गलत रिपोर्ट बनाकर और अनावश्यक ऑपरेशन करके मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ करेगा. यदि नेता ईमानदार नहीं होगा, तो वह रिश्वत लेकर दल बदलेगा और भ्रष्टाचार के जरिए धन इकट्ठा करेगा. यदि बिल्डर में नैतिकता नहीं होगी, तो वह घटिया निर्माण कर सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल देगा.
उन्होंने कहा कि यदि भारत की लोकसभा में 500 सच्चे और निष्ठावान लोग चुनकर आ जाएं, तो भारत विश्व में सुपर पावर बन सकता है. मुंबई महानगरपालिका जैसे चुनावों में सत्ता पाने की होड़ देखकर जनता के मन में सवाल उठता है कि यह सेवा के लिए हो रहा है या केवल मेवा यानी रिश्वत और स्वार्थ के लिए. इस राजनीतिक तमाशे को देखकर ऐसा लगता है मानो इंसानियत धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है.
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने प्रकृति की उदारता का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि प्रकृति केवल देना जानती है. सूर्य प्रकाश देता है, वृक्ष छाया देते हैं, पत्थर मारने पर भी आम का पेड़ मीठे फल देता है, अगरबत्ती जलकर भी सुगंध फैलाती है और धरती गड्ढा खोदने वाले को भी मीठा पानी देती है. जब प्रकृति इतनी उदार है, तो मनुष्य को उससे भी अधिक उदार और संवेदनशील होना चाहिए.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब से मनुष्य अत्यधिक स्वार्थी बना है, तब से पशु-पक्षियों, पर्यावरण और पवित्रता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है. रातों-रात करोड़पति बनने की लालसा ने जल, जमीन, जंगल और जीव-जंतुओं को भारी संकट में डाल दिया है. विकास के नाम पर हो रहे इस विनाश को यदि समय रहते नहीं रोका गया, तो आने वाली चौथी और पांचवीं पीढ़ी को शुद्ध हवा और शुद्ध पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा.
आचार्य श्री ने कहा कि वह समय ऐसा होगा जब लोगों के पास अरबों रुपये और ढेर सारा सोना तो होगा, लेकिन पानी और हवा के बिना मनुष्य तड़प-तड़प कर मृत्यु को प्राप्त होगा. इसलिए आज आवश्यकता है सच्चे इंसान बनने की, क्योंकि सच्चा इंसान ही समाज, देश और दुनिया को बचा सकता है.
