
गुरप्रीत कौर, प्रसिद्ध लेखिका, बठिंडा
जब मैं सातवीं कक्षा में पढ़ती थी, तब हमारे घर के बगल में एक परिवार रहता था .भैया, भाभी और उनका लगभग सात साल का बेटा। उनके साथ उनकी माँ भी रहती थीं। उस समय हमारे घर और उनके घर की दीवार बहुत छोटी थी. इतनी कि खड़े होकर आराम से बात की जा सकती थी।
भाभी अक्सर अपने बेटे को लेकर दीवार के पास खड़ी हो जाती थीं और वहीं से हम लोगों की बातें होती थीं। उस समय घर की बहुओं को ज़्यादा बाहर जाने की आज़ादी नहीं थी.कुछ घरों में तो आज भी नहीं है, पर तब की बात बहुत पुरानी है।
अक्सर भाभी की ननद, जिनका नाम निम्मो दीदी था, अपने मायके आया करती थीं। उनके तीन बच्चे थे.दो बेटे और एक बेटी। बच्चे इतने सुंदर थे कि उनका वर्णन करना मुश्किल था; लगता था जैसे किसी अंग्रेज़ परिवार के बच्चे हों। बोलते भी तोतला-तोतला थे, इसलिए बहुत प्यारे लगते थे। वे कभी-कभी हमारे घर भी आते और मेरी मम्मी को “नानी” कहकर बुलाते थे।
निम्मो दीदी के पति का देहांत एक कार दुर्घटना में हो गया था। उस सदमे के बाद उन्होंने फिर कभी शादी नहीं की। समय बीतता गया और बच्चे बड़े हो गए.गबरू जवान। उनके दोनों बेटे बढ़िया पगड़ी बाँधने वाले सरदार बन गए।
यह बात उस समय की है जब मैं ग्रेजुएशन कर रही थी। हमारे घर पर एक राशन की दुकान थी, जिसे मेरे भैया चलाते थे। मम्मी भी कभी-कभी दुकान पर बैठ जाती थीं।
एक दिन निम्मो दीदी की बेटी दुकान पर आई और मम्मी से बोली-
“नानी, आज तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई!”
मम्मी ने पूछा-“क्या हुआ?”
वह बोली-“मैं मनी से रोज़ मिलने जाती थी। आज रात जा नहीं पाई।”
मम्मी ने पूछा-क्यों नहीं जा पाई?”
वह बोली—“अरे नानी, हुआ यूँ कि रात को मैंने सब्ज़ी बनाई, रोटियाँ बनाईं सबके लिए। मेरा फ़ोन साइलेंट पर था। जो सब्ज़ी मैंने बनाई, वो सबको खिला दी और खुद भी खाकर सो गई।”
मम्मी ने कहा—“इसमें गड़बड़ क्या हुई? सब तो खाते हैं और सोते हैं।”
वह हँसकर बोली-
“नानी, बात ये है कि मैं रोज़ सब्ज़ी में नींद की गोली मिला देती हूँ। अपनी सब्ज़ी पहले अलग निकाल लेती हूँ, ताकि सब लोग जल्दी सो जाएँ और फिर मैं मनी से मिलने निकल जाऊँ। पर कल मैं अपनी सब्ज़ी अलग निकालना भूल गई। सब्ज़ी में नींद की गोली मिली हुई थी, तो खुद भी खा ली. नशा हो गया और मैं सो गई। मनी रात भर कॉल करता रहा, मुझे पता ही नहीं चला।”
मम्मी सुनकर चौंक गईं। उन्होंने उसे समझाया
“बेटा, ऐसा काम मत किया करो। अगर किसी को कुछ हो गया तो क्या होगा? इसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है।”
वह लड़की हँस तो रही थी, पर मम्मी की बात उसने कितनी समझी यह आज तक पता नहीं।

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