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बिछड़ने के दर्द और अधूरी मोहब्बत को दर्शाती एक उदास स्त्री की यथार्थवादी तस्वीर.

मुझे भूल जाने की आदत नहीं है

कुछ रिश्ते टूटकर भी दिल से नहीं मिटते. प्रस्तुत कविता ‘मुझे भूल जाने की आदत नहीं है’ में प्रेम, विरह, उपेक्षा और बिछड़ने की पीड़ा को बेहद संवेदनशील शब्दों में व्यक्त किया गया है. यह कविता उन भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिन्हें इंसान चाहकर भी भुला नहीं पाता.

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प्रेम की अनुभूति में डूबे प्रेमी युगल की भावुक तस्वीर

प्रेम की छोंक

जब प्रेम केवल स्पर्श नहीं, बल्कि भीतर तक उतरती हुई अनुभूति बन जाए, तब संवेदनाएँ भी नए अर्थ पाने लगती हैं. यह कविता प्रेम की उसी कोमल और आत्मीय अनुभूति को शब्द देती है.

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ट्रेन में झपकी लेते हुए अधूरी मोहब्बत के सपनों में खोई महिला

अधूरे सपने

संध्या यादव, मुंबई सुनो जान… लोग कहते हैं, थके शरीर को नींद पत्थर पर भी आ जाती है और ऐसी ही गाढ़ी कमाई वाली नींद को मिलते हैं सपने… लोग ये भी कहते हैं कि सुबह के सपने सच होते हैं। मुझे नींद तो नहीं आई, मगर अक्सर झपकी लगी। ट्रेन में हैंडल पकड़े, एक…

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रूहानी प्रेम कहानी में एक युवक और युवती के बीच खामोश भावनाएं

रूहानी चाहत

कुछ प्रेम कहानियाँ रिश्तों के नाम की मोहताज नहीं होतीं. वे विश्वास, त्याग और खामोश भावनाओं में जीती हैं. यह कहानी भी ऐसी ही एक रूहानी चाहत की कहानी है, जिसका अंत एक अनकहे सच से होता है.

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शरद अरोरा के मांसाहार त्याग और जीवदया संकल्प का प्रतीक शाकाहारी भोजन

.. अंतर्मन जागा और शरद अरोरा ने छोड़ दिया मांसाहार!

महिदपुर रोड में चातुर्मास और धार्मिक गतिविधियों के बीच शरद अरोरा ने मांसाहार त्यागकर शाकाहार और जीवदया अपनाने का संकल्प लिया. उनका यह निर्णय अहिंसा, करुणा और आत्मपरिवर्तन का प्रेरक संदेश देता है.

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उज्जैन की महाकाल सवारी में राजसी वेशभूषा में स्वामी मुस्कुराके

उधार के कपड़ों से ‘स्वामी मुस्कुराके’

उज्जैन के पंडित शैलेंद्र व्यास ‘स्वामी मुस्कुराके’ के नाम से अपनी अनूठी राजसी वेशभूषा और हँसमुख अंदाज के लिए प्रसिद्ध हैं। महाकाल की सवारी से जुड़े उनके 39 वर्षों के सफर में संघर्ष, रचनात्मकता, सामाजिक संदेश और सम्मान की कई कहानियाँ शामिल हैं।

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वर्षों की प्रतीक्षा और विरह में डूबी स्त्री को दर्शाती हिंदी कविता

प्रतीक्षा

वर्षों की प्रतीक्षा जब थकान में बदल जाती है, तो प्रेम के सामने दो ही रास्ते रह जाते हैं—अपना नाम वापस पा लेना या फिर विदा हो जाना। यह कविता उसी भावनात्मक संघर्ष और टूटते विश्वास की कहानी कहती है।

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तन्हाई और प्रेम के एहसास को दर्शाती हिंदी कविता

 “मुझे फ़र्क नहीं पड़ता”

कभी किसी की मौजूदगी सुकून देती है, लेकिन उसकी गैरमौजूदगी जिंदगी को रोक नहीं पाती। यह कविता प्रेम, आत्मनिर्भरता, तन्हाई और खामोशी के उसी खूबसूरत एहसास को शब्द देती है।

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बारिश के बीच पिता का पुराना कुर्ता पहने गरीब बच्चा

बापू का कुर्ता…

लगातार बारिश से जूझती रमा बाई और उसका आठ वर्षीय बेटा रामू गरीबी के बीच जीवन काट रहे हैं। नया कुर्ता न मिल पाने पर रामू अपने दिवंगत पिता का पुराना कुर्ता पहनता है, जो उसके लिए पिता की निशानी और माँ के लिए बीते दर्द की याद बन जाता है।

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बरसात और आँसुओं में छिपे दर्द को दर्शाती हिंदी कविता

बरसात

बरसात सिर्फ आसमान से नहीं होती, कभी-कभी आँखों से भी बरसती है। यह कविता उन अनकहे दर्द, खामोश सवालों और भीतर छिपी भावनाओं को शब्द देती है, जिन्हें इंसान मुस्कुराते चेहरे के पीछे छिपा लेता है।

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