माँ-बेटी का नाता
माँ और बेटी का रिश्ता ऐसा स्नेहिल बंधन है, जिसे दूरी और समय भी कम नहीं कर सकते। यह कविता इसी अनमोल रिश्ते की भावनाओं को शब्द देती है।

माँ और बेटी का रिश्ता ऐसा स्नेहिल बंधन है, जिसे दूरी और समय भी कम नहीं कर सकते। यह कविता इसी अनमोल रिश्ते की भावनाओं को शब्द देती है।
अन्याय के सामने मौन रहने के बजाय जागने और अपने कर्तव्यों को पहचानने का आह्वान करती यह कविता मानवता, न्याय और सामाजिक चेतना की आवाज़ बनकर सामने आती है।
प्रेम के अभाव से मिलन की उत्कंठा तक और सपनों से आत्मपहचान तक, ‘तुम वही हो?’ मनुष्य के भीतर चलने वाले भावनात्मक संसार को शब्द देती एक संवेदनशील कविता है।
हरसिंगार के धरा पर झरने को आधार बनाकर रची गई यह कविता स्नेह, समर्पण और आश्रय की तलाश को बेहद संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है।
राष्ट्रीय कवि संगम का 11वां राष्ट्रीय अधिवेशन 2 से 4 अक्टूबर 2026 तक आबू रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित होगा। अधिवेशन में देशभर से 300 से अधिक कवि और साहित्यकार शामिल होंगे। संगठनात्मक चर्चा के साथ विभिन्न काव्य गोष्ठियां और कवि सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे।
हिंसा केवल अपराध का परिणाम नहीं, बल्कि कई बार ऐसी मानसिकता का भी परिणाम होती है जो बचपन से विकसित होती है। डॉ. प्रियंका कुमार का यह लेख परवरिश, लैंगिक समानता, परिवार, विद्यालय और बच्चों में सम्मान व जिम्मेदारी के संस्कार विकसित करने की आवश्यकता पर केंद्रित है।
क्या हर उस औरत को दूसरी औरत समझ लेना सही है, जिसके साथ पति का गहरा रिश्ता हो? माइकल और सैम की बातचीत के माध्यम से प्रस्तुत यह कहानी संदेह, प्रेम, विश्वास और माँ-बेटे के अटूट रिश्ते की भावुक पड़ताल करती है. कहानी का अंत एक ऐसी सच्चाई सामने लाता है, जो पाठक को रिश्तों के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर कर देता है.