यादों का झरोखा
बीते लम्हों की खुशबू, पुरानी हँसी और अनकही बातें जब यादों के झरोखे से लौटती हैं, तो मन में एक मीठी नमी उतर आती है।

बीते लम्हों की खुशबू, पुरानी हँसी और अनकही बातें जब यादों के झरोखे से लौटती हैं, तो मन में एक मीठी नमी उतर आती है।
गुड़हल की एक छोटी-सी कलम, उसमें फूटी नन्हीं कली और फिर खिला सुंदर फूल. कीर्ति राणा का यह अनुभव प्रकृति के प्रति प्रेम, धैर्य, पर्यावरण संरक्षण और छोटे प्रयासों से मिलने वाले बड़े आनंद की कहानी है.
एक जन्मदिन, पुरानी यादें और दरवाज़े पर खड़ा एक अनजान आगंतुक। क्या श्यामबाबू अपने सामने खड़े व्यक्ति को सचमुच नहीं पहचान पाए या उनके दिल में कोई गहरी नाराज़गी है? पढ़िए भावनाओं और रिश्तों से जुड़ी कहानी का पाँचवाँ भाग।
क्या प्रेम को एक नई शुरुआत दी जा सकती है? प्रस्तुत कविता ‘प्रेम का नया सफ़र’ अधूरे ख़्वाबों, अनकही भावनाओं और साथ निभाने के नए संकल्प की संवेदनशील अभिव्यक्ति है।
ओज, तेज, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना के कवि रामधारी सिंह दिनकर को समर्पित यह कविता उनकी प्रमुख कृतियों के माध्यम से उनके विराट साहित्यिक व्यक्तित्व को स्मरण करती है.
Excerpt:
“क्या फर्क है तुममें और मुझमें” स्त्री जीवन के दो अलग अनुभवों की पड़ताल करती कविता है. मेकअप और सादगी, डर और बेबाकी, सुविधा और संघर्ष के बीच यह कविता स्त्री की अपनी पहचान और आत्मसम्मान को स्वर देती है.
नौ गज की साड़ी यानी नऊवारी महाराष्ट्र की परंपरा, संस्कृति और नारी गरिमा की पहचान है. गणेश उत्सव के दौरान इसका पारंपरिक अंदाज़ महाराष्ट्र की सांस्कृतिक खूबसूरती को और निखार देता है.
सविता सिंह मीरा से हुई एक साहित्यिक मुलाकात धीरे-धीरे बहन और दोस्त के आत्मीय रिश्ते में बदल गई। उनकी सहजता, साहित्य के प्रति समर्पण और स्नेहिल स्वभाव को याद करते हुए यह संस्मरण मीरा दी के साथ जुड़ी खूबसूरत यादों और उस अपनापन को सामने लाता है, जो उन्हें खास बनाता है।
28 जुलाई 2022 को तुलसी भवन में आयोजित सावन मिलन कार्यक्रम में हुई सविता सिंह मीरा और नीलम सिंह की पहली मुलाकात धीरे-धीरे एक आत्मीय जुड़ाव में बदल गई। पहली मुलाकात, फेसबुक पर हुई बातचीत, नृत्य की तारीफ और साहित्यिक मंचों पर लगातार मिलते रहने के बीच सविता, नीलम और पूनम की खूबसूरत तिकड़ी बन गई। सविता जी का साहित्य के प्रति समर्पण, सक्रियता और दूसरों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का स्वभाव उन्हें खास बनाता है। जन्मदिन के अवसर पर नीलम पेड़ीवाल ने सविता जी के स्वस्थ, सुखी और साहित्यिक उपलब्धियों से भरपूर जीवन की कामना करते हुए इस खूबसूरत संगत की यादों को साझा किया है।
जब मोहब्बत करने वाले दो लोग इस दुनिया में नहीं रहे, तब उनकी प्रेम कहानी एक ऐसी लड़की की आँखों में ज़िंदा रह गई, जिसने कभी उन्हें जाना तक नहीं था।