Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
बरसात की फुहारों के बीच खिड़की के पास खड़ी एक भारतीय महिला दूर क्षितिज की ओर निहार रही है। बाहर हरियाली और वर्षा है, लेकिन उसके चेहरे पर विरह, प्रतीक्षा और अनकही उदासी की गहरी छाप दिखाई देती है।

प्रतीक्षारत सावन

सावन केवल बारिश का मौसम नहीं, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षा और अनकहे दर्द का भी नाम है। ‘प्रतीक्षारत सावन’ कविता उस मनःस्थिति को अभिव्यक्त करती है, जहाँ बाहर प्रकृति हरियाली से भर उठती है, लेकिन भीतर का आँगन अब भी किसी अपने की प्रतीक्षा में सूना रहता है।

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गहरी सोच में डूबी एक महिला, जिसके चेहरे पर हल्की मुस्कान है लेकिन आँखों में छिपा दर्द और अकेलापन साफ़ झलक रहा है, जो कविता 'नज़र आती है' की भावनाओं को दर्शाता है।

नज़र आती है…

हर मुस्कान के पीछे एक अनकही कहानी होती है। ‘नज़र आती है’ कविता उन भावनाओं को स्वर देती है, जिन्हें लोग अक्सर दुनिया से छिपा लेते हैं। रिश्तों की सच्चाई, विश्वास का टूटना और भीतर का दर्द इस रचना को पाठकों के दिल के बेहद करीब ले आता है

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प्रेम में डूबी एक युवती दीपक, गुलाब और 'Miss You' लिखे कप के साथ अपने प्रिय की यादों में खोई हुई दिखाई दे रही है, जो प्यार, इंतज़ार और मुलाक़ात की भावनाओं को दर्शाती है।

बचा कर रखना थोड़ी खुशी

रिश्तों की सबसे बड़ी पूँजी छोटी-छोटी खुशियाँ होती हैं। यह कविता प्रेम, इकरार, मुलाक़ात और इंतज़ार के उन अनमोल पलों को संजोने का संदेश देती है, जहाँ मुस्कान और अपनापन ही रिश्ते की सबसे सुंदर पहचान बन जाते हैं।

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स्त्री अस्मिता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक एक दृढ़ निश्चयी भारतीय महिला, जो युद्धभूमि में आत्मविश्वास के साथ खड़ी होकर सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों को चुनौती देती दिखाई दे रही है।

स्त्रियों ने ठान ली है…

यह कविता स्त्री के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्णय की प्रखर घोषणा है। इसमें वह हर उस सामाजिक बंधन, अग्निपरीक्षा और दोहरे मापदंड को चुनौती देती है, जो सदियों से उसके अस्तित्व को सीमित करते आए हैं। यह केवल विद्रोह नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, पहचान और स्वतंत्र व्यक्तित्व की निर्भीक उद्घोषणा है।

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माँ सरस्वती वंदन | ज्ञान और विद्या पर सुंदर कविता

माँ सरस्वती वंदन

ज्ञान, विद्या, संगीत और संस्कृति की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती को समर्पित यह भावपूर्ण वंदना श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का सुंदर काव्यात्मक स्वर है। कविता में माँ सरस्वती के दिव्य स्वरूप, उनके ज्ञानमय आशीर्वाद और मानव जीवन में उनके महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया गया है।

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रात में अपनी सोती हुई बेटी को देखते हुए चिंतन में डूबी महिला आईपीएस अधिकारी

ज़िम्मेदारियां अपनी-अपनी

एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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मेघालय की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच परिवार के साथ यात्रा का सुंदर दृश्य

भागती रेल, हँसता परिवार और मेघालय की यादें

कोलकाता से ट्रेन, गुवाहाटी से बस और फिर मेघालय की मनमोहक वादियों तक पहुँची यह पारिवारिक यात्रा केवल एक शादी में शामिल होने का सफ़र नहीं, बल्कि हँसी, अपनापन, रोमांच और प्रकृति की सुंदरता से भरा अविस्मरणीय संस्मरण है।

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दहेज के बोझ से चिंतित बेटी और माता-पिता का भावुक दृश्य

दहेज प्रथा: विवाह संस्कार या सामाजिक व्यापार ?

दहेज प्रथा पर आधारित यह विचारोत्तेजक लेख विवाह जैसे पवित्र संस्कार के बदलते स्वरूप, सामाजिक मानसिकता, आर्थिक दबाव, स्त्रीधन के अधिकार और आधुनिक समाज की वास्तविकताओं पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करता है। यह लेख पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।

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एक भूखा बच्चा रोटी की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देखता हुआ

भूख

यह मार्मिक कविता भूख, ग़रीबी और सामाजिक विषमता की उस कठोर सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ एक ओर भोजन की बर्बादी है और दूसरी ओर एक निवाले के लिए तड़पते लाखों चेहरे। कविता मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का गहरा संदेश देती है।

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विरह में प्रियतम की प्रतीक्षा करती नायिका का भावपूर्ण चित्र

बिरहा की भोर 

प्रेम और विरह की गहन अनुभूति से सजी यह कविता चातक, स्वाति और मधुसूदन जैसे प्रतीकों के माध्यम से प्रतीक्षा, तड़प और आशा का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है। हर पंक्ति पाठक को भावनाओं की गहराई तक ले जाती है।

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