मंद मुस्कान के साथ खड़ी एक युवती, जिसकी आँखों में बचपन और प्रेम की मासूम यादें झलक रही हैं।

लम्हा

कुछ रिश्ते उम्र नहीं, एहसास जीते हैं। “लम्हा” कविता सोलह-सत्रह की मासूमियत, बचपन की खुशबू और प्रेम की कोमल मुस्कुराहटों को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती है।

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गाँव की पगडंडी पर स्कूल बैग लेकर मुस्कुराती हुई एक मासूम बालिका, संतोष और सादगी का प्रतीक।

संतुष्ट मुस्कान

अधूरी इच्छाओं और भागती जिंदगी के बीच सच्ची संतुष्टि कहाँ मिलती है? “संतुष्ट मुस्कान” कविता एक मासूम बालिका की मुस्कान में जीवन का गहरा दर्शन खोजती है।

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रात की खामोशी में डायरी के सामने बैठी एक भावुक स्त्री, अधूरी मोहब्बत और अनकहे सवालों में डूबी हुई।

मन का कोरा पन्ना

कुछ प्रश्न जीवन में हमेशा अनुत्तरित रह जाते हैं। “मन का कोरा पन्ना” प्रेम, पीड़ा, विवशता और अनकहे एहसासों की ऐसी ही संवेदनशील यात्रा है, जहाँ शब्दों से अधिक खामोशी बोलती है।

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रंग-बिरंगे फूलों से भरा सुंदर बगीचा, जिसकी खुशबू और प्राकृतिक सुंदरता मानसिक शांति का अनुभव करा रही है।

फिर छिड़ी बात फूलों की….

फूल प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार हैं, जो सौंदर्य, सुगंध और भावनाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। उनकी खुशबू न केवल रिश्तों में मिठास घोलती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती है।

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परीक्षा

जन्म से शुरू हुई प्रतिस्पर्धा, रिश्तों की कसौटी, बच्चों की उड़ान और अंत में ईश्वर की अंतिम परीक्षा — यह कविता जीवन के हर पड़ाव को गहराई से छूती है।

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मोबाइल और फास्ट फूड में व्यस्त आधुनिक बच्चे, चिंतित माता-पिता और बदलती परवरिश को दर्शाता दृश्य।

आधुनिक जीवनशैली का बच्चों पर असर

आज के बच्चों को हर सुविधा आसानी से मिल रही है, लेकिन इसके साथ वे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड और अत्यधिक लाड़-प्यार बच्चों के अनुशासन, संस्कार और आत्मनिर्भरता को प्रभावित कर रहे हैं।

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परीक्षा हॉल में चिंतित छात्र, NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता दृश्य।

नीट पेपर लीक : जिम्मेदार कौन?

NEET पेपर लीक केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के सपनों और विश्वास पर गहरा आघात है। वर्षों की मेहनत, परिवारों के त्याग और युवाओं के संघर्ष के बाद जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, तो केवल परीक्षा नहीं टूटती, बल्कि पूरा भरोसा बिखर जाता है। अब समय आ गया है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, दोषियों को कठोर सजा मिले और ऐसी पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जहाँ मेहनत का मूल्य पैसों और पहुंच से अधिक हो।

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काम से लौटे पिता का अपने बच्चों के साथ भावनात्मक और स्नेहपूर्ण दृश्य

पिता : बिना दुनिया अधूरी

पिता केवल परिवार का आधार नहीं, बल्कि वह मौन शक्ति हैं जो अपने सपनों से पहले बच्चों की खुशियों को चुनते हैं। यह कविता पिता के प्रेम, त्याग और अपनत्व को समर्पित है।

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विदेश में खड़ी एक भारतीय महिला अपने वतन को याद करते हुए भावुक दिखाई दे रही है

विदेश में वतन की याद

विदेश की ठंडी हवाओं में भी दिल अपने वतन की खुशबू खोजता रहता है। यह कविता परदेस में रहकर भारत और अपनों की यादों को महसूस करने वाले हर भारतीय की भावनाओं को शब्द देती है।

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अपने अधूरे सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष करती एक भारतीय महिला का भावनात्मक दृश्य

उसने छोड़े नहीं थे, बस छिपा लिए थे सपने

कुछ लड़कियाँ अपने सपने छोड़ती नहीं, बस वक्त और जिम्मेदारियों के नीचे छिपा देती हैं। यह कहानी एक ऐसी ही लड़की की है, जिसने परिस्थितियों से समझौता किया, लेकिन अपने भीतर की पहचान को कभी मरने नहीं दिया।

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