gulmohar
पहाड़ों के बीच अतीत के अपराध और प्रतिशोध से जूझती महिला का भावनात्मक दृश्य

अतीत की परछाइयाँ

एक पुराना अपराध वर्षों बाद लौटकर सोनिया के वर्तमान को हिला देता है. बेटे के अपहरण से खुलते अतीत के रहस्य में अपराध, प्रतिशोध, पश्चाताप और न्याय आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं.

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मौन प्रेम और अनकहे एहसास को दर्शाता शांत भावपूर्ण दृश्य

मौन प्रेम की ऋचाएँ

जब प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं रहता, तब नीरवता भी बहुत कुछ कहने लगती है. ‘मौन प्रेम की ऋचाएँ’ अनकहे प्रेम और आत्मीय एहसासों की संवेदनशील अभिव्यक्ति है.

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सुनहरी ढलती सांझ में डूबता सूरज और किसी प्रिय की याद में खोया मन

 सुनहरी ढलती सांझ

ढलती सांझ, खामोश हवा और डूबते सूरज की किरणों में किसी अपने की याद. ‘सुनहरी ढलती सांझ’ प्रेम, विरह और इंतज़ार की भावनाओं को शब्द देती खूबसूरत कविता है.

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अवधेशानंदजी महाराज से बातचीत करते वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा

जब बेबाक पत्रकार भी कुछ पल के लिए ठहर गए

वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने बड़े-बड़े लोगों से बेबाक बातचीत की है, लेकिन अवधेशानंदजी महाराज के सामने उनकी सहजता में एक अलग ही भाव दिखाई दिया. यह मुलाकात सम्मान, आत्मीयता और लंबे समय से संजोई इच्छा की कहानी है.

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गलतियों से सीखते हुए आत्म-अन्वेषण करता व्यक्ति

गलतियाँ

शावर भकत ‘भवानी ‘ गलतियाँ भीसही होने या सही करने के लिएनैसर्गिक मार्गदर्शक बनकरस्व-पथ निर्माताबनने की ओर ले जाती हैं। विदित है किगलतियों के भय सेअकर्मण्य बने रहनागलतियों में ही विद्यमान होना है। वस्तुतः गलती नहीं करनानवीन सीखने की चेष्टा मात्र से भीपृथक हो जाना है। तर्कसंगत भी है कि गलतियाँकिए बिना सीखना असंभव है।…

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परिवार के आपसी प्रेम और सम्मान को देखकर प्रसन्न वास्तुविद्

मुखरित संवेदनाएँ

एक वास्तुविद् घर का निरीक्षण करने आता है, लेकिन परिवार के आपसी प्रेम, सम्मान और सामंजस्य को देखकर उसे एहसास होता है कि ऐसे घर में किसी वास्तुदोष की गुंजाइश ही नहीं।

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श्याम बाबू पुराने घर में पोते रवि के साथ भावुक पल बिताते हुए

खामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं…

पोते रवि के लौटने से श्याम बाबू की सूनी जिंदगी में खुशियाँ लौट आती हैं, लेकिन पुराने घर की दीवारें उन्हें उस बेटे मोहन की याद दिलाती हैं, जिसका आज भी इंतजार है।

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उज्जैन में स्वामी सत्यमित्रानंदजी के 94वें प्राकट्य दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

सिंहस्थ से पहले संतों का संदेश: आध्यात्मिकता के साथ विकास की राह पर आगे बढ़े समाज

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरिजी महाराज के 94वें प्राकट्य दिवस पर उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संतों की सामाजिक भूमिका और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों पर चर्चा की.

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