पिता : बिना दुनिया अधूरी

काम से लौटे पिता का अपने बच्चों के साथ भावनात्मक और स्नेहपूर्ण दृश्य

गौसिया परवीन, बिजनौर

पिता वो अनमोल मोती है
जिसकी कामना सब करते हैं
बचपन में जब खेल कर घर आते हैं
तो राह पिता की तकते हैं
लाएंगे कुछ खास वो आज
यही आस बस रखते हैं
काम से लौटकर
थक कर वो आएं
फिर भी किसी से कोई शिकायत नहीं करते हैं
पिता वो अनमोल मोती है
जिसकी कामना सब करते हैं

गोद में बैठकर उनकी
हम तमाम फरमाइशें करते हैं
थके हों, चाहे हो वो कितना ही परेशान
फिर भी हमारी हर ख्वाहिश का ध्यान रखते हैं
हम चाहें कर जाएं जितनी भी गलतियां
हमेशा उन्हें माफ करते चलते हैं
बड़े हो जाएं हम चाहे जितने भी
छोटे उन्हें सदा लगते हैं
पिता वो अनमोल मोती है
जिसकी कामना सब करते हैं

हर कदम पर वो हमारे
हमेशा साथ चलते हैं
मां यदि ममत्व की मूरत है
तो पिता अपनत्व का पैमाना है
जान लिया जिसने पिता को
क़दमों तले उसके सारा ज़माना है
ज़माने भर के सितम,
खुद पर वो सह जाते हैं
फिर भी
मुख पर अपने मुस्कान सजाए रखते हैं
पिता वो अनमोल मोती है
जिसकी कामना सब करते हैं

जिसके बिना ये संसार आधा लगता है
जिसके बिना ये आत्मा अधूरी है
पिता हमारा वो हिस्सा है
जिसके बिना ये दुनिया
सचमुच,
अधूरी है!
मान न टूटे हमसे उसका कभी
यही प्रण बस करते हैं
पिता वो अनमोल मोती है
जिसकी कामना सब करते हैं।

लेखिका के बारे में-


गौसिया परवीन
समकालीन हिंदी साहित्य की एक संवेदनशील एवं उभरती हुई युवा लेखिका हैं, जिनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं, स्त्री जीवन, रिश्तों की गहराई और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण मिलता है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से संबंध रखने वाली गौसिया परवीन ने कविता, निबंध, लेख और उपन्यास जैसी विभिन्न साहित्यिक विधाओं में अपनी सशक्त लेखनी का परिचय दिया है।राजनीति विज्ञान में एम.ए., बी.एड. तथा एम.एड. (अध्ययनरत) की शिक्षा प्राप्त कर रहीं गौसिया परवीन साहित्य और शिक्षा, दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उनकी रचनाएं विभिन्न समाचार पत्रों एवं साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हो चुकी हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद से कविता प्रसारण तथा रेडियो संदेश 89.6 एफ.एम. से लेख प्रसारण ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। उनका चर्चित उपन्यास “मोहब्बत हो ही जाती है” पॉकेट नोवेल ऐप पर प्रकाशित हो चुका है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। साहित्य, वाद-विवाद, भाषण और लेखन प्रतियोगिताओं में प्राप्त अनेक पुरस्कार उनकी प्रतिभा और निरंतर सृजनशीलता के प्रमाण हैं। गौसिया परवीन की लेखनी संवेदनाओं की उस मिट्टी से जन्म लेती है, जहाँ शब्द केवल लिखे नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं। उनकी रचनाएं पाठकों के मन में गहरी छाप छोड़ती हैं और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देती हैं।


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6 thoughts on “पिता : बिना दुनिया अधूरी

  1. बहुत मार्मिक कविता है। जिसका हर शब्द सत्य की पराकाष्ठा है👌👌👌👌💎

  2. बहुत मार्मिक कविता है। जिसका हर शब्द सत्य की पराकाष्ठा है👌👌👌👌💎

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