
यादों का झरोखा
कभी धूप सी खिलती हैं, कभी छाँव सी ढलती हैं,
बीते लम्हों की खुशबू बन, यादें चुपके से चलती हैं।
ना कोई आहट होती है, ना कोई दस्ताक होती है,
सोए हुए दिल के कोने में, बस एक हलचल होती है।
पुराने पन्नों की तरह जब मन का अल्बम खुलता है,
हर एक पल मानो फिर से आँखों के आगे सजता है।
वो हँसी जो किसी मोड़ पर छूट गई थी कल,
वो बातें जो अनकही ही रह गई थीं उस पल,
सब लौट आती हैं बनकर आँखों में एक नमी,
बताने कि जीवन में आज भी है उनकी कमी।
वक्त भले ही आगे बढ़ता जाए अपनी चाल से,
पर यादें बाँधकर रखती हैं हमें बीते हुए साल से।

Superb ❤️