Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

तेरे चेहरे का नूर

तेरे चेहरे का नूर विषय पर प्रेम और रूहानी एहसास दर्शाती हिंदी कविता सच्चा प्रेम चेहरे की चमक में नहीं, रूह से जुड़े उस एहसास में होता है जो उम्र के साथ भी कायम रहता है।

गीता मित्तल, मेरठ

जिससे प्रेम करते हैं, उसके सामने,
सोने की चमक भी फीकी लगती है,
चाँद अपनी चाँदनी समेटकर,
बादलों की ओट में छिप जाता है।

तेरे चेहरे का नूर कुछ ऐसा है,
कि एक झलक में सुकून उतर आता है,
मन के वीरान कोने में,
अनदेखा-सा दीप जल जाता है।

मेरी मुस्कान में है दुआओं का असर,
तेरी आँखों में मेरे ख़्वाबों का संसार है,
तुझे देखना महज़ देखना नहीं,
जैसे अपनी ही रूह से मिलना है।

न हीरे-मोती की चाहत,
न चाँद-सितारों का गुरूर,
तेरे साथ के दो पल ही काफ़ी,
मेरे जीवन को साँसें देने के लिए।

तेरी ख़ामोशी भी कुछ कहती है,
तेरी हँसी में आँधी-सी आती है,
तू पास हो तो हर उदासी,
सुकून की महीन चादर में सिमटती है।

प्रेम केवल चेहरे की चमक नहीं,
यह तो आत्मा का उजाला है,
जिसे दिल ने सच्चाई से चाहा,
वही सबसे अपना, सबसे निराला है।

उम्र के साथ रूप बदल जाए,
चेहरे पर थकान की रेखाएँ आ जाएँ,
फिर भी प्रेम वही बना रहे,
जब रूह से रूह के रिश्ते निभ जाएँ।

तेरे चेहरे का नूर नहीं केवल,
तेरे होने की रोशनी है,
तू मेरे लिए कोई ख़्वाब नहीं,
मेरे मन की सबसे सच्ची ख़ुशी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *