
चंद्रमती चतुर्वेदी, बस्ती (अयोध्याधाम)
आओ मिलकर आज सभी, दीपोत्सव मनाया जाय,
मन के सारे भेद मिटाकर, प्रेम का दीप जलाया जाय।
मिट्टी के दीपों में फिर से, आशाओं का तेल भरें,
नफ़रत के अँधियारों को हम, मिलकर आज दूर करें।
घर-आँगन के साथ हृदय में, उजियारा फैलाया जाय,
आओ मिलकर आज सभी, दीपोत्सव मनाया जाय।
कोई घर सूना न रह जाए, कोई भूखा सोने न पाए,
खुशियों की सौगात बाँटकर, हर चेहरा मुस्काए।
रूठे हुए हृदय को फिर से, प्यार से आज मनाया जाय,
आओ मिलकर आज सभी, दीपोत्सव मनाया जाय।
दीप जलें विश्वास के, दीप जलें सद्भाव के,
दीप जलें इंसानियत के, दीप जलें शुभभाव के।
राम नाम की पावन धुन से, जन-जन को हर्षाया जाय,
आओ मिलकर आज सभी, दीपोत्सव मनाया जाय।
मिट्टी का दीपक कहता है, तम से कभी न हारना,
आँधी आए, तूफ़ाँ आए, फिर भी जलते रहना।
जीवन के हर कठिन मोड़ पर, हौसला बढ़ाया जाय,
आओ मिलकर आज सभी, दीपोत्सव मनाया जाय।
नारी का सम्मान हो घर में, बेटी को अधिकार मिले,
श्रम करने वाले हाथों को, मेहनत का प्रतिफल मिले।
सत्य-धर्म की राह पकड़कर, नया सवेरा लाया जाय,
आओ मिलकर आज सभी, दीपोत्सव मनाया जाय।
