हर चौखट पर मुस्कान खिले
दीपावली केवल घरों को सजाने और दीप जलाने का पर्व नहीं है। यह कविता श्रीराम के आदर्शों, बचपन की यादों, मिट्टी के दीप बनाने वाले कुम्हार की उम्मीदों और समाज में प्रेम, करुणा तथा इंसानियत का उजाला फैलाने का संदेश देती है।

दीपावली केवल घरों को सजाने और दीप जलाने का पर्व नहीं है। यह कविता श्रीराम के आदर्शों, बचपन की यादों, मिट्टी के दीप बनाने वाले कुम्हार की उम्मीदों और समाज में प्रेम, करुणा तथा इंसानियत का उजाला फैलाने का संदेश देती है।
दीपावली केवल घर-आँगन रोशन करने का त्योहार नहीं, बल्कि मन के अँधियारे मिटाने का अवसर भी है। यह कविता प्रेम, विश्वास, सद्भाव, नारी सम्मान और जरूरतमंदों के साथ खुशियाँ बाँटने का संदेश देती है।
हेमा जोशी “स्वाति” लोहाघाट (उत्तराखंड) चौदह वर्ष वनवास पूर्ण कर,राम अयोध्या आए हैं।घर-घर दीप जले खुशियों के,दीवाली मनाई है। आज अवधपुरी में फिर से,त्रेतायुग यह आया है।दीप उजालों के जलाकर,अंधकार मिटाया है। सजी रंगोली हर द्वारे पर,तोरण द्वार सजाया है।सरयू के पावन तट पर देखो,अगणित दीप जलाए हैं। सिया-लखन संग रघुकुल नंदन,रथ सवार हो आए…
दीपक की छोटी-सी लौ बड़े से बड़े अंधकार को चुनौती देती है. लालच, कुंठा और निराशा के अंधेरे को मिटाकर अंतर्मन को प्रकाशित करने का संदेश देती यह कविता दीपोत्सव के वास्तविक अर्थ को समझाती है।